वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने एक ऐसा प्रस्ताव पारित किया है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करना है।
प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान में जारी सैन्य अभियान को कांग्रेस की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ाया जाए और राष्ट्रपति सैन्य कार्रवाई को रोकें। हालांकि यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
अपनी ही पार्टी के सांसदों ने दिया झटका
प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। मतदान के दौरान कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन से हटकर प्रस्ताव का समर्थन किया। रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मतदान किया।
डेमोक्रेटिक पार्टी के किसी भी सांसद ने प्रस्ताव का विरोध नहीं किया। कांग्रेस के कई सदस्यों का तर्क है कि लंबे समय तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई के लिए विधायिका की मंजूरी आवश्यक है।
महंगाई और आर्थिक दबाव भी बना मुद्दा
प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कुछ सांसदों ने युद्ध के कारण बढ़ती आर्थिक चुनौतियों का हवाला दिया। उनका कहना है कि लगातार सैन्य अभियान का असर ईंधन, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे आम नागरिकों पर बोझ बढ़ रहा है।
रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने कहा कि अमेरिकी जनता महंगाई और बढ़ती लागत से परेशान है तथा यह मतदान दर्शाता है कि देश में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है।
60 दिन से अधिक सैन्य कार्रवाई पर उठे सवाल
अमेरिकी कानून के तहत 60 दिनों से अधिक समय तक चलने वाले विदेशी सैन्य अभियानों की समीक्षा और कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक मानी जाती है। इसी आधार पर ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वार पावर्स एक्ट के अनुसार कांग्रेस की अनुमति के बिना राष्ट्रपति लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी नहीं रख सकते। विपक्ष और कुछ रिपब्लिकन सांसदों का आरोप है कि प्रशासन ने आवश्यक संसदीय स्वीकृति के बिना अभियान जारी रखा।
अभी कानून बनने की प्रक्रिया बाकी
हालांकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पारित होने के बाद भी यह प्रस्ताव तत्काल कानून नहीं बनेगा। इसके लिए अमेरिकी सीनेट से मंजूरी आवश्यक होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर या संभावित वीटो की प्रक्रिया होगी।
यदि राष्ट्रपति वीटो करते हैं, तो उसे निरस्त करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा है।
फिलहाल इस प्रस्ताव को अमेरिकी संसद द्वारा युद्ध संबंधी अधिकारों पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम और ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।