लद्दाख। भारत-चीन सीमा के निकट स्थित लद्दाख का चुमुर गांव देश का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ बनने जा रहा है। समुद्र तल से करीब 16,700 फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव को केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP)’ के तहत चयनित किया गया है। बुधवार को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी।
चुमुर गांव, जहां केवल 24 परिवारों के 91 लोग निवास करते हैं, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वहां आबादी को मजबूत बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह गांव वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के काफी करीब स्थित है और यहां के अधिकांश लोग पश्मीना बकरियों के पालन से अपनी आजीविका चलाते हैं।
सरकार की योजना के अनुसार चुमुर को आत्मनिर्भर, पर्यटन के अनुकूल और आर्थिक रूप से सशक्त गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। गांव के सभी परिवारों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त जलवायु-अनुकूल घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इन घरों में थर्मल इंसुलेशन तकनीक का उपयोग होगा, जिससे अत्यधिक ठंड और कठिन मौसम का सामना करना आसान होगा।
प्रशासन का लक्ष्य है कि सितंबर 2026 तक चुमुर को सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ ही पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प और पश्मीना उद्योग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो सके।
आधारशिला समारोह के दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता और वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य सीमा गांवों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित होगी।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित सीमांत गांवों के विजन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाकर वहां के लोगों को बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है।
चुमुर मॉडल सीमा गांव न केवल सीमावर्ती विकास की नई मिसाल बनेगा, बल्कि देश की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।