निवेदिता फाउंडेशन की शिप्रा देवी को शक्ति अंचल वासियों ने दी श्रद्धांजलि

2 फरवरी को निवेदिता फाउंडेशन के कार्यालय में हुआ श्रधांजलि सभा का आयोजन

शिप्रा देवी की स्मृति में प्रति वर्ष देश भर की महिला संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से दिए जाएंगे 60000/-के अवार्ड

शक्ति शहर में शिप्रा देवी की स्मृति में शिप्रा देवी मेमोरियल भवन का होगा निर्माण

शक्ति– शक्ति अंचल में विगत अनेकों वर्षों से एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में निवेदिता फाउंडेशन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली शिप्रा देवी के विगत दिनों हुए निधन के पश्चात 2 फरवरी को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन निवेदिता फाउंडेशन शक्ति के वार्ड क्रमांक- 17 स्थित कार्यालय में किया गया, इस दौरान जहां शक्ति शहर सहित आसपास के अंचल की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों सहित पत्रकार साथियों ने भी इस श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित होकर शिप्रा देवी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की,तो वहीं इस अवसर पर शिप्रा देवी के पति संतन जी के द्वारा बताया गया कि विगत दिनों शिप्रा देवी का आकस्मिक निधन हो गया, तथा उनके निधन से हम सभी शोकाकुल हैं,श्रद्धांजलि सभा के दौरान आगंतुक जनों ने भी अपने मुखारविंद से शिप्रा देवी को सामाजिक कार्यों एवं महिला के अधिकारों के प्रति सदैव जागरूकता का कार्य करने वाली एक अग्रणी महिला बताया, तथा उनके निधन से पूरे क्षेत्रवासियों को दुखी होने की बात कही, 2 फरवरी को निवेदिता फाउंडेशन शक्ति के कार्यालय में दिनभर उनकी याद में एवम आत्मा की शांति हेतु भजन- कीर्तन हुआ,तथा इस श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर निवेदिता फाउंडेशन शक्ति की ओर से सभी आगंतुकों द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के प्रति उनका आभार व्यक्त किया गया

उल्लेखित हो की शिप्रा जी का जन्म उड़िसा राज्य के बानपुर ब्लाक के हाथीगुंडा गांव में 20 जून 1976 को हुआ, बचपन से ही साहसी और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहने और रखने वाली दीदी चार बहन और एक भाई में से तीसरे नम्बर की थी,छात्र जीवन से ही वे बानपुर तहसील के बरबरा वनांचल में रहने वाले आदिवासी समुदाय के बीच संगठन बनाना शुरू कर दी थीं। उन्होंने जंगल पर स्थानीय समुदाय के मौलिक अधिकार को लेकर स्वर्गीय पूर्णो भाई, बड़ी दीदी संध्या देवी के साथ मिलकर काम की शुरूवात किया था। बीए पास करने के बाद 02 फरवरी 2002 को संतन जी के साथ विवाह हुआ और ओडिशा के कालाहाण्डी में समान विचारधारा के युवाओं के साथ मिलकर ग्राम स्तर पर सामुदायिक संगठनों का निर्माण किया,मायके और ससुराल दोनों पक्षों के सदस्य लम्बे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े होने के कारण छत्तीसगढ़ में 9 अगस्त 2008 को छत्तीसगढ़ को कार्यक्षेत्र के रूप में चुना, और तेजी से प्रदेश स्तर पर महिला अधिकार नेत्री के रूप में उभर कर अपनी पहचान बनाई थी,उन्होंने प्रदेश स्तर पर छत्तीसगढ़ महिला मंच का गठन कर शराबबंदी और महिला हिंसा के मुद्दों को उठाते हुए छत्तीसगढ़ में महिला नीति पर ड्राफट बनाकर सरकार को सौपा था

वे कालाहाण्डी जिले में संस्थाओं के संघ के अध्यक्ष रही. नेशनल काउन्सिल ऑफ वूमेन लीडर के संस्थापक सदस्य थी । प्रदेश भर के महिला संगठनों को जोड़कर उन्होंने साझा मंच का गठन किया और महिलाओं के अधिकार और हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाते रही,छत्तीसगढ़ की महिलाओं की स्थिति और समस्याओं को रखने प्रतिनिधि के रूप में उनका चयन किया गया था वे मलेशिया में आयोजित एशिया स्तरीय बैठक में 2020 में शामिल हुई 2021 में विश्व की सबसे बड़ी संस्था जो महिलाओं के लिए काम करती है। यूनाईटेड नेशन वूमन के बैठक में उनका चयन किया गया था। लेकिन कोविड 19 के कारण इसे कैंसल करना पड़ा

गलत बातों और अन्याय का हर समय विरोध करना उनका स्वभाव था, गलतियों पर तुरंत टोकना और बेबाकी और मुखर होकर विरोध करना उनके नेतृत्व का विशेष गुण था, चाहे वे उनकी निजी परिवार के सदस्य हो या आम नागरिक, गलत बातों को वे कभी बर्दास्त नहीं करती थीं। 5000 से अधिक युवाओं, किशोरी बालक और बालिकाओं और महिलाओं का संगठन बनाकर उन्हें लैंगिक आधार पर होने वाले हिंसा भेदभाव और असमानता के मुद्दे पर प्रशिक्षित किया हर समय वे अपने अनुभव से सीखे बातों को स्पष्ट तौर पर रखती थीं,उन्होंने कभी किताबी बातों को महत्व नहीं दिया। महिला हिंसा और और लैंगिक आधार पर भेदभाव पर उनकी गहरी समझ थी। उनके द्वारा गठित छत्तीसगढ़ महिला मंच में आज 20 हजार से अधिक महिलायें जुड़े हैं

हमने एक ऐसे महिला लीडर को खोया है, जिसकी पूर्ति करना असंभव हैं उन्होंने जो इतिहास बनाया है उसे जीवंत रखना हम सभी का कर्तव्य है,12 जनवरी 2022 को भुवनेश्वर के सम हास्पिटल में चिकित्सा के दौरान उनका निधन हो गया,हर समय महिलाओं के सहयोग और सहायता के लिए तत्पर रहती थी उन्होंने जाति पंचायत के मुखियाओं के साथ मिलकर जाति समुदाय के समितियों में महिलाओं को सदस्य बनाने और निर्णय लेने की भूमिका में लाने के लिए प्रयास कर रहीं थी, उन्होंने सबरिया समुदाय के पहचान और उनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर नृजातिय अध्ययन करवाकर प्रदेश सरकार को सौपा था

संस्था और संगठन के काम को उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष उनके यादगार में 60 हजार रूपये का सिप्रा देवी मेमोरियल अवार्ड की घोषणा देश भर के महिला संगठनों के साथियों द्वारा ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा के दौरान किया गया। यह अवार्ड उन महिलाओं और लड़कियों को प्रतिवर्ष दिया जायेगा जो महिलाओं और लड़कियों के बेहतरी, कल्याण और विकास की दिशा में काम कर रही हैं या करना चाहती हैं,निवेदिता फाउन्डेशन के तरफ से सिप्रा देवी मेमोरियल भवन का निर्माण होगा, जहाँ महिलाओं को आकर महिलाओं के लिए बैठक और प्रशिक्षण का आयोजन करेंगी और महिलाओं से संबंधित कार्यों और गतिविधियों का संचालन होगा

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