शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला: रेड रोड से हटकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई ईद की नमाज, ट्रैफिक को मिली राहत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब राजधानी कोलकाता में कई प्रशासनिक बदलाव साफ नजर आने लगे हैं। नई सरकार ने ऐतिहासिक रेड रोड पर होने वाली मुख्य ईद की नमाज को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट करने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि इस कदम से शहर की लंबे समय से प्रभावित ट्रैफिक व्यवस्था को बड़ी राहत मिली है।

दरअसल, कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर वर्षों से ईद की मुख्य नमाज आयोजित होती रही है। नमाज के दौरान कई घंटों तक सड़क बंद रहने से उत्तर और दक्षिण कोलकाता के बीच यातायात बुरी तरह प्रभावित होता था। प्रशासन का कहना है कि इस बार नमाज को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में स्थानांतरित करने से ट्रैफिक सामान्य बना रहा और लोगों को भारी जाम से राहत मिली।

सरकार के इस फैसले को लेकर शुरुआत में राजनीतिक बहस जरूर छिड़ी, लेकिन धीरे-धीरे मुस्लिम समाज के कई प्रमुख धार्मिक नेताओं ने भी इसका समर्थन किया। नखोदा मस्जिद के इमाम समेत कई धर्मगुरुओं ने कहा कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड ज्यादा खुला और सुविधाजनक स्थान है। इमाम शफीक कासमी ने इसे “सकारात्मक कदम” बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक आयोजन भी सुचारु तरीके से हो सकेगा और आम लोगों को परेशानी भी नहीं होगी।

प्रशासन के मुताबिक, ब्रिगेड परेड ग्राउंड रेड रोड से महज आधा किलोमीटर दूर स्थित है और वहां बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है। इसी कारण सुरक्षा और यातायात प्रबंधन दोनों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।

गौरतलब है कि रेड रोड केवल एक प्रमुख सड़क नहीं, बल्कि कोलकाता की ऐतिहासिक और रणनीतिक पहचान का हिस्सा भी है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस सड़क का इस्तेमाल इमरजेंसी रनवे के तौर पर किया जाता था। उस समय रॉयल एयर फोर्स (RAF) के लड़ाकू विमान यहीं से उड़ान भरते और उतरते थे।

आज भी रेड रोड कोलकाता का अहम VIP कॉरिडोर माना जाता है, जो उत्तर और दक्षिण कोलकाता को जोड़ने का प्रमुख मार्ग है। प्रशासनिक, सैन्य और आपातकालीन दृष्टि से इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सड़क कुछ घंटों के लिए भी बंद हो जाए, तो पूरे शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा सकती है।

नई सरकार के इस फैसले को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। समर्थक इसे प्रशासनिक सुधार बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे परंपराओं में हस्तक्षेप करार दे रहा है।

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