नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में लगातार घिर रही केंद्र सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर गुरुवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में NEET परीक्षा में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर चर्चा की जा रही है। साथ ही भविष्य में परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़े फैसलों पर विचार किया जा रहा है। जानकारी सामने आई है कि सरकार प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और संरक्षण की जिम्मेदारी सेना को सौंपने पर भी विचार कर रही है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।
बैठक में छात्रों की चिंताओं को दूर करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार और NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा जैसे मुद्दों पर भी मंथन चल रहा है। विवादों के केंद्र में रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह को विशेष रूप से तलब किया गया है। उनके साथ पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी परीक्षा आयोजन में हुई कथित लापरवाही और शिकायतों पर विस्तृत रिपोर्ट ले रहे हैं।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
इस मामले की जांच CBI कर रही है। एजेंसी अब तक 10 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार लोगों में पुणे के केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी, जिन्हें इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, लातूर के डॉक्टर मनोज शिरुरे, पुणे के फिजिक्स टीचर तेजस हर्षदकुमार शाह समेत कई शिक्षक और कोचिंग से जुड़े लोग शामिल हैं।
CBI जांच में सामने आया है कि प्रोफेसर कुलकर्णी पहले NTA से सब्जेक्ट ऑब्जर्वर के तौर पर जुड़े थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने अपनी पहुंच का दुरुपयोग कर अंतिम प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई और बाद में इन्हें छात्रों तथा कोचिंग संचालकों तक पहुंचाया गया।
अब केंद्र सरकार इस पूरे मामले में परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी में जुटी हुई है।