नई दिल्ली/योग्यकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के अंतिम दिन ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया और वहां पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने करीब 1000 वर्ष पुराने इस मंदिर के संरक्षण और पुनरुद्धार परियोजना की शुरुआत की।
इंडोनेशिया के योग्यकार्ता में स्थित प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। मंदिर परिसर में कुल 240 मंदिर संरचनाएं हैं, जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।
‘विरासत और विकास’ नीति के तहत संरक्षण कार्य
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार विदेशों में स्थित प्राचीन भारतीय और हिंदू-बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनरुद्धार को बढ़ावा दे रही है। प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
भारत इससे पहले भी कई देशों में ऐतिहासिक विरासत स्थलों के संरक्षण में सहयोग कर चुका है। इनमें वियतनाम, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश, कंबोडिया, लाओस और बहरीन जैसे देश शामिल हैं।
रामायण की कथाओं से जुड़ा है मंदिर
प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथाओं को पत्थरों पर उकेरा गया है, जो इसकी स्थापत्य कला और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले कहा था कि प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की मजबूत छाप को दर्शाता है।
भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा
प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से भारत अपनी साझा विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को संरक्षित करने में सहयोग कर रहा है।