नई दिल्ली। NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ में भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया गया है। नई किताब में जाति, धर्म, नस्ल, लिंग और दिव्यांगता के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को भी भेदभाव का आधार माना गया है।
यह बदलाव ‘नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य’ अध्याय में किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि किसी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, दिव्यांगता, शारीरिक बनावट, लिंग, यौन पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर अनुचित व्यवहार करना भेदभाव की श्रेणी में आता है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर भी फोकस
नई NCERT पुस्तक में कहा गया है कि भेदभाव केवल सामाजिक पहचान के आधार पर ही नहीं होता, बल्कि आर्थिक स्थिति भी कई बार किसी व्यक्ति के अवसरों और अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा और समाज में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
किताब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी आधार पर भेदभाव करना नैतिक रूप से गलत होने के साथ-साथ कानून के खिलाफ भी है।
भेदभाव की परिभाषा को लेकर बढ़ी थी चर्चा
NCERT का यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव को लेकर बहस चल रही है। हाल ही में जारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समानता से जुड़े नियमों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता जैसे आधारों का उल्लेख किया गया है, लेकिन आर्थिक स्थिति का अलग से जिक्र नहीं किया गया था।
इसके बाद कई विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव को भी स्पष्ट रूप से मान्यता देने की मांग उठाई थी।
कक्षा 9 की किताब में भी किए गए बदलाव
इससे पहले NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तकों में भी बदलाव किए हैं। नए पाठ्यक्रम में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत के चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़ा अध्याय शामिल किया गया है।
नई किताबों में छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और सामाजिक समानता से जुड़े विषयों को नए दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया गया है।