नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पूर्वोत्तर भारत की कृषि, संस्कृति और स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। दिल्ली हाट में 10 से 12 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय मेघालय अनानास महोत्सव 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव का उद्देश्य मेघालय के प्रसिद्ध अनानास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाना, किसानों एवं उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराना और कृषि आधारित कारोबार को बढ़ावा देना है।
तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। यहां आने वाले लोग मेघालय के ताजे अनानास, उनसे तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों, स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि क्षेत्र से जुड़े नवाचारों को करीब से देख सकेंगे।
10 जुलाई को होगा भव्य उद्घाटन
महोत्सव का उद्घाटन समारोह 10 जुलाई को शाम 5 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि कॉनराड के. संगमा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मेघालय की कृषि क्षमता, किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों के विपणन और पूर्वोत्तर भारत के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इस अवसर पर मेघालय पाइनएप्पल पर आधारित विशेष वीडियो का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
किसानों और उद्यमियों को मिलेगा बड़ा मंच
महोत्सव में किसानों और उद्यमियों को अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान Flipkart और National e-Repository Limited (NeML) के बीच एमओयू साइनिंग सेरेमनी भी आयोजित की जाएगी। यह पहल मेघालय के अनानास उत्पादकों को डिजिटल बाजार और नए व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘मेघालय अनानास: चार संस्करणों का सफर’ पुस्तिका का विमोचन
महोत्सव के उद्घाटन समारोह में ‘मेघालय अनानास: चार संस्करणों का सफर’ नामक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया जाएगा। इसमें महोत्सव के पिछले संस्करणों की उपलब्धियों और मेघालय के अनानास उद्योग के विकास की यात्रा को प्रस्तुत किया गया है।
संस्कृति, स्वाद और व्यापार का संगम
मेघालय अनानास महोत्सव 2026 सिर्फ कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं होगा, बल्कि यह मेघालय की समृद्ध संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और उद्यमिता को दिल्ली के लोगों तक पहुंचाने का मंच बनेगा।
आयोजकों के अनुसार, महोत्सव में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। दिल्लीवासियों और पर्यटकों को यहां पूर्वोत्तर भारत के स्वाद और संस्कृति का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।