संस्कारधानी में पानी पर बड़ा सवाल: 230 करोड़ के बाद भी रोज दौड़ रहे 75 टैंकर

राजनांदगांव। शहर में पेयजल संकट दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। अमृत मिशन योजना के तहत करीब 230 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद राजनांदगांव के कई वार्डों में आज भी लोग टैंकरों से पानी लेने को मजबूर हैं।

स्थिति यह है कि नगर निगम को रोजाना करीब 70 से 75 टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई करनी पड़ रही है। इन टैंकरों के संचालन में प्रतिदिन लगभग 250 लीटर से ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है, जिसकी लागत करीब 25 हजार रुपये रोजाना बताई जा रही है।

30 साल की प्लानिंग, 8 साल में भी नहीं मिली राहत

अमृत मिशन योजना की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी। योजना के तहत शहर के 51 वार्डों में पाइपलाइन विस्तार किया गया था और दावा किया गया था कि अगले 30 साल तक पेयजल समस्या नहीं होगी।

लेकिन योजना शुरू होने के करीब आठ साल बाद भी कई इलाकों में पानी की समस्या बनी हुई है।

इन इलाकों में टैंकरों से पहुंच रहा पानी

शहर के बाबूटोला, नया ढाबा, लखोली, रेवाडीह, पेंड्री, कौरिनभांठा, चिखली, शंकरपुर, मोहारा, हल्दी, कन्हारपुरी, राजीव नगर और बसंतपुर जैसे क्षेत्रों में अब भी टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।

नगर निगम के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में रोजाना बड़ी संख्या में टैंकर भेजे जा रहे हैं।

45 हजार कनेक्शन के बाद भी संकट

राजनांदगांव शहर में 45 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन होने के बावजूद आउटर और अंदरूनी इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है। गर्मी बढ़ते ही समस्या और गंभीर हो जाती है।

शहर में प्रतिदिन करीब 4 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी की खपत हो रही है, लेकिन इसके बाद भी कई वार्डों तक पर्याप्त जलापूर्ति नहीं पहुंच पा रही है।

पुराने टैंकरों से बढ़ रही परेशानी

जलापूर्ति में लगे कई टैंकर पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इसके कारण पानी सप्लाई के दौरान काफी पानी सड़कों पर बह जाता है। वहीं टैंकर पहुंचते ही पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ लग जाती है, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बनती है।

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भरता बनी रहने से अब अमृत मिशन योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *