होर्मुज बना तनाव का केंद्र: अमेरिका-ईरान आमने-सामने, बढ़ा बड़े युद्ध का खतरा

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन गई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लेकर बंदर अब्बास तक कई ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिका ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट्स और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों पर हमले किए जाने का दावा किया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। अमेरिकी सेना ने बताया कि लड़ाकू विमानों और नौसेना के विमानों से सटीक हथियारों (Precision Weapons) का इस्तेमाल कर ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद बढ़ा तनाव

दरअसल, तनाव उस समय बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि गश्त कर रहे अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हालांकि, अमेरिका ने बताया कि दोनों पायलट सुरक्षित हैं।

इसके बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेना के मुताबिक, होर्मुज क्षेत्र के आसपास मौजूद ईरानी निगरानी और रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया।

ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार का दावा किया

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया।

ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया और चेतावनी दी कि आगे भी हमले जारी रहे तो जवाब और कड़ा होगा।

बंदर अब्बास और केश्म द्वीप पर धमाके

ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास और केश्म द्वीप इलाके में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ये दोनों क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है।

ईरान ने हेलीकॉप्टर गिराने से किया इनकार

ईरान ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने के आरोपों से इनकार किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने इस घटना को बहाना बनाकर हमला किया है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र में किसी भी बड़े टकराव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

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