नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) के एक बयान को लेकर देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। MEA ने कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं, बल्कि केवल एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इस बयान के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य होगा।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि करना है। यह एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे कई सरकारी रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर जारी किया जाता है।
MEA के इस बयान पर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज अंतिम माना जाएगा।
सिब्बल ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि अगर किसी अधिकारी को किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो जाए तो उसके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है।
वहीं शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने MEA के बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो इसे जारी करने से पहले सरकार किस आधार पर सत्यापन करती है।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारतीय पासपोर्ट किसी गैर-भारतीय को भी जारी किया जा सकता है?
MEA ने दी सफाई
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पूरी जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसियों के सत्यापन शामिल होते हैं।
MEA ने कहा कि नए ई-पासपोर्ट में बायोमेट्रिक डेटा जैसी सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी गई हैं, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्वीकार्यता बढ़े।
फिलहाल पासपोर्ट को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बनी हुई है।