thethinkmedia@raipur
विष्णुदेव से कौन नाखुश? रेणुका के निशाने में सीएम क्यों?
भाजपा विधायक पूर्व केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें राज्य की सत्ता और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लेकर कई तरह की बातें की जा रही है। वहीं इस ऑडियो में पूर्व सीएम भूपेश बघेल का भी जिक्र है। इस कथित टेप में यह कहा जा रहा है कि उपर कोई सरकार से बहुत खुश नहीं है। लेकिन इतना जल्दी हटाया नहीं जा सकता। अब रेणुका किसे हटाने की बात कर रही हैं? यह तो वही जानेंगी। लेकिन इस बीच यह ऑडियो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस ऑडियो के वायरल होने के दौरान ही केन्द्रीय गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने सीएम विष्णुदेव साय को अपने प्रवास के दौरान 100 मे से 100 अंक दिए हैं। शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यो और उनकी सहजता की खुले मंच से सराहना की है। ऐसे में उपर भला विष्णुदेव साय से कौन नाखुश हो सकता है? यह तो रेणुका सिंह ही बता पायेंगी। फिलहाल सीएम विष्णुदेव साय का नाम इतिहास के स्वर्णिम अक्षरो में लिखा जाएगा। उनके मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के नासूर से मुक्त हुआ है। इसके साथ ही उनके मुख्यमत्रित्व काल में राज्य की महिलाओं को आर्थिक रुप से सक्षम बनाया जा रहा है, महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। रिकार्ड 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों की धान खरीदी जा रही है। गरीबों के ईलाज के लिए 5 लाख रुपये तक की व्यवस्था की गई है, गरीबों को छत दिया गया है। आधा से अधिक कार्यकाल बीत जाने के बाद भी सीएम विष्णुदेव साय पर कोई गंभीर आरोप नहीं लगे हैं। ऐसे में भला मुख्यमंत्री से उपर कौन नाखुश होगा? यह तो रेणुका ही बता सकती हैं। फिलहाल यहां उपर-नीचे सभी विष्णुदेव साय से खुश दिखाई दे रहे हैं।
कल्लूरी, प्रदीप, विवेकानंद स्पेशल डीजी, सुंदरराज जांएगे दिल्ली
बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे में आईजी पी सुंदरराज की महती भूमिका रही है। सुंदरराज नक्सलवाद के खात्मे के लिए हर मोर्चे पर डटे रहे। अमित शाह ने अब बस्तर को नक्सल मुक्त होने का प्रमाण पत्र भी दे दिया है। ऐसे में सुंदरराज की भूमिका को देखते हुए उन्हें बडा तोहफा दिया जा सकता हैं। कहा जा रहा है कि सुंदरराज की पदस्थापना एनआईए में की जा सकती है। वहीं इसी दौरान कई आईपीएस अफसरों के तबादले भी हो सकते हैं। दूसरी ओर तकरीबन 30 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 1994 बैच के आईपीएस अफसर शिवराम प्रसाद कल्लूरी, 1995 बैच के अफसर प्रदीप गुप्ता एवं 1996 बैच के अफसर विवेकानंद सिन्हा की पदोन्नति भी होने जा रही है। कल्लूरी, प्रदीप और विवेकानंद स्पेशल डीजी बनाए जा सकते हैं। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में मंजूरी के संकेत हैं। दरअसल वर्तमान में डीजी रैंक के केवल चार पद स्वीकृत हैं, जिसमें डीजीपी अरुण देव गौतम, डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, डीजी पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन पवन देव एवं जीपी सिंह तैनात हैं। पद खाली न होने के कारण इन अफसरों की पदोन्नति रुकी हुई है। ऐसे 3 स्पेशल डीजी के पद पर सरकार मुहर लगा सकती है।
पद को लेकर खिचीं तलवारें
कांग्रेस के अंदर यदि गुटबाजी की बात सामने आने लगे तो समझ जाइए कि अब राज्य में चुनावी गतिविधियां शुरु हो चुकी हैं, या किसी बड़े पद पर नियुक्ति होने को है। वैसे भी वर्तमान पीसीसी चीफ दीपक बैज का कार्यकाल पूरा हो रहा है। अब नए पीसीसी चीफ की नियुक्ति होना तय है। और नये पीसीसी चीफ ही कांग्रेस पार्टी की ओर से सीएम पद के प्रमुख दोवदार होंगे। ऐसे में बडे नेताओं की बीच तलवारें खिचना स्वाभाविक है। वहीं दूसरी ओर साय सरकार का इंटरवेल हो चुका है, यानि कि आधा कार्यकाल बीत चुका है। जिसके चलते विपक्ष ने अब चुनावी जमीन टटोलना शुरु कर दिया है। विष्णु सरकार के इंटरवेल के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल और दीपक बैज के एक होने की खबर है। तो वहीं भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव और टीएस सिंहदेव की नजदीकियों की भी चर्चे हैं। एक ओर जहां अब कांग्रेस सत्ता के विरुद्ध लडाई तेज करने की कोशिश में जुट गई है, तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर अन्तरकलह भी इन दिनों चरम पर है। यह कलह यहां तक पहुंच गई कि पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सिंहदेव को दिल्ली की राजनीति में जाने की सलाह दे डाली। बैज ने कहा कि सिंहदेव बडे कद के नेता है, उन्हें दिल्ली की राजनीति में जाना चाहिए। तो वहीं सिंहदेव भी अपने स्वाभाव के विपरीत पलटवार करते नजर आये। सिंहदेव ने पार्टी की नाकामियों का ठीकरा बैज पर फोड दिया। खैर यह कांग्रेस के कल्चर में है, यहां आरोप-प्रत्यारोप चलता रहता है। लेकिन इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी दांव-पेंच भी शुरु हो गया है।
तबादलों के बीच चांदी
जून माह में तबादलों से बैन हटाया जा सकता है। जिसको लेकर इन दिनों कुछ अफसरों और नेताओं की चांदी हो गई है। कहा तो यह भी जा रहा है कि तबादलों की सुगबुगाहट के बीच कुछ विभागों में रेट फिक्स कर दिए गए हैं। हालांकि बीते साल एक विभाग में तबादले को लेकर जमकर विवाद सामने आया था। कहीं ऑडियो वायरल हो रहे थे, तो कहीं शिकायतों की झडी लगी हुई थी। खैर कितना भी विवाद हो तबादलों का सीजन आने से विशेष गुण रखने वाले अफसर और नेता चांदी काटने में जुट ही जाते हैं, भले ही बाद में विभाग की व्यवस्था धराशयी हो जाए। दरअसल पडोसी राज्य मध्यप्रदेश में तबादलो से बैन हटाया गया है। मध्यप्रदेश में 1 जून से 15 जून तक तबादले होंगे। हालांकि यहां पर मुख्यमंत्री का महत्वपूर्ण कार्यक्रम सुशासन तिहार चल रहा है, जहां पर मुख्यमंत्री जनता की समस्यों का त्वरित निराकरण कर रहे हैं। वहीं प्रशासन भी शिविर लगाकर समास्याओं के समाधान में जुटा है। ऐसे में 10 जून के बाद ही तबादलों से बैन हटने के आसार हैं।
विवेक आचार्य ‘फ्लाप शो’
सीनियर आईएफएस अनिल साहू को छत्तीसगढ पर्यटन मंडल से हटवाकर एमडी बने विवेक आचार्य धरातल पर ‘फ्लाप शो’ की तरह दिखने लगे हैं। राज्य में वन आधारित टूरिज्म की बात छोड दें तो पर्यटन विभाग का डब्बा गुल है। प्रकृति का सबसे खूबसूरत स्थल छत्तीसगढ़ पर्यटक विहीन नजर आता है, आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? यहां अभी तक देश-विदेश से आये पर्यटकों से कितनी आय प्राप्त हुई इसका मूल्यांकन करने से इस ‘फ्लाप शो’ की झलक देखी जा सकती है। खैर कहा तो यह भी जा रहा है विवेक आचार्य की वजह से 100 एकड में तकरीबन 400 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही फिल्म सिटी भी विवादों से घिर गई है। सरकार ने दिसम्बर 2024 में नवा रायपुर में फिल्म सिटी बनाने का ऐलान किया आज मई 2026 है, लेकिन फिल्म सिटी अभी तक मूर्त रुप नहीं ले पाई है। नतीजन विपक्ष इन दिनों
फिल्म सिटी परियोजना को रोकने के लिए सड़क पर उतर गया है। दरअसल फिल्म सिटी परियोजना के नाम पर प्रस्तावित माना-तूता जंगल की कटाई का चारों ओर विरोध शुरु हो गया है। वास्तव में यदि यह परियोजना भी अधर में पड गई तो अब तक के सबसे ‘फ्लाप शो’ में विवेक आचार्य का नाम शामिल हो जाएगा।
26 मई को हेड ऑफ फॉरेस्ट पर मुहर
अरुण देव गौतम को पूर्णकालिक डीजीपी बनाए जाने के बाद नए हेड ऑफ फॉरेस्ट को लेकर वन विभाग को बेसब्री से इंजतार है। वर्तमान वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास राव की सेवा अवधि 31 मई को खत्म हो रही है। उनके रिटायरमेंट के आखिरी दो दिन सरकारी अवकाश हैं। ऐसे में सोमवार या मंगलवार को विदाई समारोह आयोजित किया जा सकता है। वहीं इसी बीच नए हेड ऑफ फॉरेस्ट का ऐलान भी हो सकता है। हांलाकि अभी तक डीपीसी की तारीख निर्धारित नहीं की गई है। जिससे यह कयास लागाया जा रहा है कि पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण कुमार पांडे को प्रभार दिया जा सकता है। वहीं डीजीपी की तर्ज में कुछ दिनों बाद इसके लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
दुष्कर्म की कहानी का सच क्या?
राज्य में इन दिनों एक दुष्कर्म की कहानी खूब चर्चा में है। दरअसल जब तक जांच पूरी न हो जाए तो इसे कहानी मात्र ही कहा जा सकता है। क्योंकि आरोप रुपयों से जुडा हुआ है। पीडित भाजपा नेत्री बताई जा रही है और आरोपी ठेकेदार, दोनो ही रसूखदार हैं। ऐसे में किसने किसका शोषण किया फिलहाल इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकता है। निश्चित ही प्रथम दृष्टया मामला कारोबार से जुडे होने की आशंका है। खैर पुलिस बिना देरी के आरोपी ठेकेदार संजय सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हांलाकि दोनो पक्षों ने रुपयों के लेन-देन का आरोप लगाया है। वहीं गिरफ्तारी के दौरान आरोपी का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें महिला नेत्री पर कोल मांइस दिलाने के नाम पर 80 लाख रुपये लेने के आरोप लगाए गए हैं। बाद में कोल मांइस नहीं मिलने पर ठेकेदार संजय सिंह ने रुपये वापस मांगने की बात कही है। भाजपा नेत्री ने अपने शिकायत में कहा है कि 15 सितम्बर 2025 को आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। सवाल यह उठता है कि शिकायत में इतनी देरी क्यों की गई? वहीं घटना के बाद भी आरोपी के साथ महिला नेत्री घूमते रहीं? होटल में भी रुकीं? खैर आम जनमानस में ऐसे सवाल उठना लाजमी है। निश्चित ही शिकायर्ता भाजपा नेत्री भी कटघरे में है। ऐसे में असली सच तो जांच के बाद ही उजागर होगा।