नई दिल्ली। NCERT की कक्षा 6 की तीसरी भाषा (कन्नड़) की नई पाठ्यपुस्तक ‘कृष्णा’ को लेकर कर्नाटक में विवाद खड़ा हो गया है। कई शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किताब पर भगवाकरण का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं।
आलोचकों का कहना है कि पुस्तक में धर्म, पौराणिकता और शाकाहार को ज्यादा महत्व दिया गया है। खासतौर पर ‘Health is Wealth’ अध्याय में संतुलित आहार के उदाहरणों में अंडा, मछली और मांस का उल्लेख नहीं होने पर आपत्ति जताई गई है।
शिक्षाविदों का आरोप है कि किताब में कर्नाटक की विविध संस्कृति, लोककथाओं और क्षेत्रीय पहचान को पर्याप्त जगह नहीं दी गई है। कुछ कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पुस्तक का नाम भी बदला जाए और इसे राज्य की संस्कृति को दर्शाने वाला बनाया जाए।
विवाद के बीच NCERT ने सफाई जारी करते हुए कहा कि ‘कृष्णा’ नाम किसी धार्मिक या राजनीतिक उद्देश्य से नहीं रखा गया है। NCERT के अनुसार भाषा की किताबों के नाम भारत की प्रमुख नदियों पर आधारित हैं। हिंदी पुस्तक का नाम ‘गंगा’, अंग्रेजी का ‘कावेरी’, उर्दू का ‘जमुना’ और कन्नड़ पुस्तक का नाम कर्नाटक की प्रमुख नदी ‘कृष्णा’ के नाम पर रखा गया है।
NCERT ने संतुलित आहार वाले अध्याय पर भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि किताब में किसी भी तरह से शाकाहार को श्रेष्ठ या अनिवार्य नहीं बताया गया है। संस्था के मुताबिक, अध्याय का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ भोजन के प्रति जागरूक करना है और पुस्तक में शाकाहारी व मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों को शामिल किया गया है।
NCERT ने कहा कि नई किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के तहत तैयार की गई हैं और इनमें विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को ध्यान में रखा गया है।