दरअसल, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम सरकार ने आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके चलते पार्टी 2026 के आम चुनाव में भी हिस्सा नहीं ले पाई थी।
अब चुनाव आयोग ने आवामी लीग के नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए हलफनामा दाखिल करने की शर्त रखी है। उम्मीदवारों को यह बताना होगा कि वे किसी प्रतिबंधित या देश विरोधी संगठन से जुड़े नहीं हैं। इसके बाद ही उनके नामांकन स्वीकार किए जाएंगे।
बांग्लादेश में इस साल के आखिर तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी चल रही है। चुनाव आयोग का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
वहीं, विपक्षी दलों में भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि आवामी लीग के नेताओं को चुनाव में उतरने का मौका देने से पार्टी कमजोर हो सकती है, जबकि कुछ का कहना है कि इससे पार्टी दोबारा मजबूत होकर वापसी कर सकती है।
फिलहाल शेख हसीना भारत में हैं और आवामी लीग को मिली यह अनुमति बांग्लादेश की आगामी राजनीति में अहम मोड़ मानी जा रही है।