क्या TMC में दोहराया जाएगा ‘महाराष्ट्र मॉडल’? बढ़ीं पार्टी टूटने की चर्चाएं

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते मतभेदों ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी में कथित सिग्नेचर फर्जीवाड़ा विवाद और दो विधायकों के निष्कासन के बाद अब टीएमसी में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के भीतर एक अलग गुट सक्रिय हो सकता है, जो भविष्य में स्वतंत्र पहचान के साथ सामने आने का दावा कर सकता है।

विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ विधायकों ने दावा किया कि बैठक रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। मामले की जांच के दौरान संबंधित एजेंसियों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। इसी बीच पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वाले दो विधायकों को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ विधायक और नेता मौजूदा नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। हाल ही में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने भी इन चर्चाओं को और हवा दी है। बताया जा रहा है कि बैठक में अपेक्षित संख्या में विधायक नहीं पहुंचे, जिसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने संगठन के भीतर असंतोष की संभावना जताई है।

हालांकि, टीएमसी नेतृत्व ने पार्टी में किसी बड़े विभाजन की संभावना से इनकार किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल और कुछ बाहरी ताकतें उनके विधायकों और नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ जनप्रतिनिधियों को बैठक में शामिल न होने के लिए डराया-धमकाया गया।

फिलहाल टीएमसी के भीतर चल रहे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। हालांकि पार्टी में टूट या नए राजनीतिक समूह के गठन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व और असंतुष्ट नेताओं के रुख से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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