नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर अभ्यर्थियों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। परीक्षा देने वाले कई उम्मीदवारों और कोचिंग विशेषज्ञों ने इसे अब तक का सबसे कठिन प्रीलिम्स पेपर बताया है।24 मई को आयोजित इस परीक्षा के बाद सोशल मीडिया और कोचिंग सर्किल्स में चर्चा तेज हो गई है कि जनरल स्टडीज पेपर-I का स्तर सामान्य से काफी ऊपर था। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्न न सिर्फ कठिन थे, बल्कि उनकी लंबाई भी असामान्य रूप से अधिक थी, जिससे समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार प्रश्न पत्र लगभग 56 पन्नों का था, जिसमें कई पन्नों पर केवल दो ही प्रश्न दिए गए थे। उम्मीदवारों को 100 प्रश्न हल करने के लिए 120 मिनट का समय मिला, जिससे प्रति प्रश्न औसतन एक मिनट से भी कम समय मिला।
कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कई प्रश्न इतने लंबे थे कि उन्हें पढ़ने और समझने में ही काफी समय लग गया। एक उम्मीदवार ने दावा किया कि वह अपनी अच्छी तैयारी के बावजूद केवल 66 प्रश्न ही हल कर पाया।
कोचिंग एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि इस बार पैटर्न में बदलाव साफ नजर आया है और प्रश्नों की भाषा और गहराई ने परीक्षा को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
इसी बीच, कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि सामान्यतः मुख्य परीक्षा (Mains) के स्तर के माने जाने वाले विषय, जैसे एथिक्स और इंटीग्रिटी से जुड़े सवाल भी प्रीलिम्स में पूछे गए, जिससे कठिनाई और बढ़ गई।
परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों में निराशा और चर्चा का माहौल है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि UPSC का पेपर हर साल अपने अप्रत्याशित पैटर्न के लिए जाना जाता है और इस बार भी आयोग ने उसी प्रवृत्ति को आगे बढ़ाया है।