भोपाल | ट्विशा शर्मा मृत्यु प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने ट्विशा की सास और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को 28 मई को गिरफ़्तार कर लिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अंतरिम राहत निरस्त किए जाने के बाद की गई।
क्या है पूरा मामला?
ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल स्थित घर में मृत पाई गई थीं। 15 मई को इस मामले में प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज किया गया। उसी दिन भोपाल की निचली अदालत ने गिरिबाला सिंह को अंतरिम जमानत दे दी थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने कहा कि:
- आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं
- जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं किया गया
- साक्ष्यों की समुचित जांच नहीं हुई
- प्रकरण में लगातार गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं
गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र पर आरोप
गिरिबाला सिंह पर दहेज मृत्यु, महिला के साथ क्रूरता तथा अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
उनके पुत्र और ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अभिरक्षा में हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने न्यायालय में क्या कहा?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने न्यायालय को बताया कि:
- ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान पाए गए
- ये चोटें शव को नीचे उतारते समय नहीं लगीं
- चलचित्र अभिलेखन का एक भाग सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित किया गया
- ट्विशा पर जबरन गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया
- संदेशों के आदान-प्रदान से मानसिक प्रताड़ना और चरित्र पर संदेह के संकेत मिले
- दहेज को लेकर असंतोष व्यक्त किया जाता था
साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप
पीड़िता के पिता के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह ने घटनास्थल से छेड़छाड़ की। उनका कहना था कि सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी होने के कारण उन्हें साइबर फॉरेंसिक और अपराध स्थल प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त था, जिसका उपयोग इस प्रकरण में किया गया।
गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त होने और गिरफ़्तारी के बाद ट्विशा शर्मा के परिवार ने न्यायपालिका तथा मामले में समर्थन देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।