रायपुर | छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड-डीएड पाठ्यक्रम, रिक्त पदों पर भर्ती और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक लता उसेंडी ने सरकार से इस संबंध में सवाल किए, जिस पर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में जवाब दिया।
विधायक लता उसेंडी ने पूछा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने, रिक्त पदों पर भर्ती और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर क्या स्थिति है। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वीकृत पदों और भर्ती प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी।
जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल 31 विभाग हैं, जिनमें से पांच विभाग अभी शुरू नहीं हुए हैं।
मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि विश्वविद्यालय में 146 पदों के विरुद्ध 113 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भर्ती से जुड़ी शिकायतों की जांच कराई गई थी और जांच के बाद रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी गई थी। शिकायतें निराधार पाए जाने के बाद उनका निराकरण कर दिया गया।
बीएड और डीएड पाठ्यक्रम को लेकर लता उसेंडी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल नए बीएड-डीएड पाठ्यक्रम शुरू नहीं किए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत इन पाठ्यक्रमों को चार वर्षीय स्वरूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
विधायक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू है और महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय भी इसके अंतर्गत काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नया सांख्यिकी विभाग शुरू किया जा रहा है और आईआईटी व आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए हैं।
वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में चार वर्षीय बीएड और डीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी को लेकर सवाल किया। मंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो आवश्यक सुझाव देगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश के कई महाविद्यालयों को नए पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक मानकों को पूरा करना होगा और यूजीसी के नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।