रायपुर । विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी), निमोरा रायपुर में राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। तीन दिवसीय यह कार्यशाला 3 से 5 अगस्त 2026 तक आयोजित है, जिसमें प्रदेश के निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों और उनके दायित्वों की जानकारी दी जा रही है।
कार्यशाला का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना और उन्हें अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रियाओं से अवगत कराना है। कार्यक्रम में जिला पंचायतों की विभिन्न स्थायी समितियों के सभापति भी शामिल हुए।
इस अवसर पर विकसित भारत–जीरामजी योजना के आयुक्त श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि विजन@2047 के अनुरूप ग्रामीण भारत को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 लागू किया गया है।
ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
श्री सिन्हा ने बताया कि अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। साथ ही मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों का चयन और अनुमोदन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास में जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।
जिला पंचायत सदस्यों को दिया जा रहा व्यवहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दूसरे दिन सरगुजा, रायपुर और बस्तर संभाग के जिला पंचायत सदस्यों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। इस दौरान संयुक्त आयुक्त श्री रामधन श्रीवास, एसआईआरडी के संकाय सदस्य श्री आनंद रघुवंशी और अन्य मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभागियों को अधिनियम के प्रावधानों और उनके व्यवहारिक उपयोग की जानकारी दी।
ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण
प्रशिक्षण सत्रों में वीबी-जीरामजी अधिनियम, 2025 की अवधारणा एवं उद्देश्य, पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका, विकसित ग्राम पंचायत योजना, पात्र परिवारों का पंजीयन, ग्रामीण रोजगार कार्ड, निगरानी व्यवस्था, शिकायत निवारण प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक अंकेक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्देश्य जिला पंचायत प्रतिनिधियों को आवश्यक ज्ञान और कौशल से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें। इससे ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत होगी और सहभागी, पारदर्शी एवं सतत ग्रामीण विकास को गति मिलेगी।