हॉकी इंडिया सचिव भोलानाथ सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप, IOA ने गठित की 4 सदस्यीय जांच समिति

नई दिल्ली। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने हॉकी इंडिया के सचिव भोलानाथ सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए चार सदस्यीय स्वतंत्र समिति का गठन किया है। यह मामला भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया की कार्यकारी बोर्ड सदस्य असुंता लाकड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।

खेल मंत्रालय के निर्देश पर गठित इस समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश दीपा शर्मा करेंगी। समिति में पूर्व ट्रैक एंड फील्ड एथलीट वंदना राव, भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान ममता खरब और अधिवक्ता सितवत नबी शामिल हैं।

लाकड़ा ने लगाए थे गंभीर आरोप

असुंता लाकड़ा ने हॉकी इंडिया के सचिव भोलानाथ सिंह पर उन्हें कथित तौर पर धमकाने और परेशान करने के आरोप लगाए थे। ये आरोप उस समय सामने आए जब लाकड़ा ने झारखंड में स्थानीय कोच सुधीर गोला पर लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न को लेकर चिंता जताई थी।

मामले के बाद खेल मंत्रालय ने IOA से लाकड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए एक पैनल गठित करने को कहा था।

हॉकी इंडिया को जांच में सहयोग के निर्देश

IOA अध्यक्ष पीटी उषा ने हॉकी इंडिया को पत्र भेजकर जांच समिति को पूरा सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हॉकी इंडिया से समिति को आवश्यक दस्तावेज, सूचनाएं और जरूरत पड़ने पर अन्य सहायता समय पर उपलब्ध कराने को कहा गया है।

IOA के अनुसार जांच से संबंधित समिति के सदस्यों का मानदेय, यात्रा, आवास और अन्य आवश्यक खर्च हॉकी इंडिया द्वारा वहन किया जाएगा।

लाकड़ा और हॉकी इंडिया के बीच पहले से चल रहा विवाद

यह मामला लाकड़ा और हॉकी इंडिया के बीच चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। इससे पहले हॉकी इंडिया की एथिक्स कमेटी ने लाकड़ा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

दरअसल, झारखंड की खिलाड़ी अलबेला रानी टोप्पो ने लाकड़ा पर कथित तौर पर धमकाने और उनके करियर को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। लाकड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए एथिक्स कमेटी की कार्रवाई को अपने खिलाफ डराने-धमकाने और बदले की कार्रवाई बताया था।

इसके बाद लाकड़ा ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया से संपर्क कर एथिक्स कमेटी की कार्रवाई में हस्तक्षेप की मांग की थी।

अब भोलानाथ सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनसे संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा स्वतंत्र समिति करेगी। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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