सिराज पर भारी पड़े शमी! दलीप ट्रॉफी में घातक गेंदबाजी से टीम इंडिया में वापसी का ठोका दावा

स्पोर्ट्स । दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपनी शानदार गेंदबाजी से एक बार फिर साबित किया कि अनुभव और तकनीक का कोई विकल्प नहीं है। साउथ जोन के खिलाफ मुकाबले में शमी ने तीसरे दिन 11 ओवर में 4 मेडन के साथ महज 17 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए।

ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में साउथ जोन की टीम 336 रन पर सिमट गई। ईस्ट जोन को पहली पारी में 372 रन की बढ़त मिली।

फ्लैट पिच पर शमी की खास रणनीति

चेन्नई की गर्म और उमस भरी परिस्थितियों में शमी ने लंबे स्पेल के बजाय छोटे-छोटे स्पेल में गेंदबाजी की। उनका फोकस स्टंप्स की लाइन पर गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखने पर रहा।

लाल मिट्टी की पिच पर गेंद जल्दी खराब होने की स्थिति को देखते हुए शमी और उनके साथी गेंदबाजों ने गेंद को संभालकर रखने पर विशेष ध्यान दिया। पसीने के इस्तेमाल से गेंद को बेहतर स्थिति में बनाए रखने की कोशिश की गई, जिससे पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने में मदद मिली।

इसी रणनीति का फायदा शमी को मिला और उन्होंने रिवर्स स्विंग के जरिए शेख रशीद और स्मरण रविचंद्रन को अपना शिकार बनाया।

मुकेश कुमार के साथ दिखी शानदार जुगलबंदी

शमी के साथ मुकेश कुमार ने भी प्रभावी गेंदबाजी की। दोनों गेंदबाजों ने परिस्थितियों को समझते हुए छोटे स्पेल में गेंदबाजी करने की रणनीति अपनाई।

मुकेश के मुताबिक चेन्नई की गर्मी में 5-6 ओवर के लंबे स्पेल के दौरान गेंदबाजों को क्रैंप्स की समस्या हो सकती है। इसलिए गेंदबाजी समूह ने छोटे स्पेल में अधिकतम प्रयास करने की रणनीति बनाई। गेंद को संभालकर रखने और रिवर्स स्विंग हासिल करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

सिराज के प्रदर्शन से तुलना

मुकाबले में मोहम्मद सिराज उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ सके और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। उनके प्रदर्शन और शमी की गेंदबाजी की तुलना ने एक बार फिर अनुभवी तेज गेंदबाज की टीम इंडिया में वापसी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

शमी ने आखिरी बार भारत के लिए 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में लगातार मौका नहीं मिला है। दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन ऐसे समय आया है, जब भारतीय टीम के आगामी विदेशी दौरों और भविष्य की टेस्ट योजनाओं को लेकर चयनकर्ताओं के सामने तेज गेंदबाजी संयोजन का सवाल अहम है।

क्या शमी को फिर मिलना चाहिए मौका?

दलीप ट्रॉफी में शमी की गेंदबाजी ने यह जरूर दिखाया है कि वह कठिन परिस्थितियों में भी अपनी तकनीक और अनुभव के दम पर प्रभाव डाल सकते हैं। खासकर लाल गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने और सटीक लाइन-लेंथ बनाए रखने की उनकी क्षमता अब भी उनकी बड़ी ताकत है।

ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने सवाल है कि क्या अनुभवी शमी को आगामी मुकाबलों के लिए एक और मौका दिया जाए। उनके मौजूदा प्रदर्शन ने राष्ट्रीय टीम में वापसी की उम्मीदों को निश्चित तौर पर फिर मजबूत कर दिया है।

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