मोहला। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के तीनों विकासखंडों के सरपंचों ने मंगलवार को जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चार सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में सरपंच जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला पंचायत कार्यालय व कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।
सरपंचों ने प्रशासन पर पंचायतों की अनदेखी करने और जनप्रतिनिधियों को सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया। घंटों इंतजार के बाद भी कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर सरपंचों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने उग्र आंदोलन के साथ सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे दी।
सरपंच संघ के प्रतिनिधियों ने पहले जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात की, लेकिन बातचीत से संतुष्ट नहीं होने पर वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उनका आरोप है कि पंचायतों के कामकाज, मनरेगा भुगतान, टैक्स कलेक्शन और अन्य मुद्दों पर प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा है।
प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने मनरेगा कार्यों में कथित कमीशनखोरी और भुगतान में देरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि काम पूरा होने के बाद भी भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है और फाइलों में बार-बार आपत्तियां लगाकर परेशान किया जाता है।
सरपंचों ने मानदेय बढ़ाने और पंचायत प्रतिनिधियों को उचित सम्मान देने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में पंचायतों की अहम भूमिका है, लेकिन अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
प्रदर्शनकारी सरपंचों ने “सुशासन तिहार” कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने इसे “कुशासन तिहार” करार दिया।
कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर सरपंचों ने नाराजगी जताई और बिना ज्ञापन सौंपे वापस लौट गए। जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र भुआर्य ने कहा कि सभी सरपंच शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे थे, लेकिन उनकी उपेक्षा की गई।
सरपंच संघ ने बुधवार को होने वाली ग्राम सभाओं के बहिष्कार और पंचायतों के प्रशासनिक कार्य बंद रखने की घोषणा की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सामूहिक इस्तीफे पर भी निर्णय लिया जा सकता है।