रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डूमरतराई में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का लोकार्पण और नामकरण समारोह 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का लोकार्पण कर इसे प्रदेश के व्यापारियों और आम जनता को समर्पित करेंगे।
समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री ओ.पी. चौधरी करेंगे। कार्यक्रम पहले 5 जुलाई को प्रस्तावित था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था।
36 एकड़ में विकसित हुआ अत्याधुनिक व्यापारिक परिसर
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर करीब 36 एकड़ क्षेत्र में तैयार किए गए इस थोक बाजार को व्यापारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, बेहतर यातायात व्यवस्था और आवश्यक नागरिक सुविधाओं का विकास किया गया है।
यह बाजार रायपुर समेत पूरे प्रदेश के व्यापारिक क्षेत्र को नई दिशा देने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।
दो चरणों में हुआ निर्माण कार्य
डूमरतराई व्यापारिक परिसर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया गया है।
- पहले चरण में करीब 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें और हॉल तैयार किए गए।
- दूसरे चरण में करीब 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया।
दोनों चरण पूरे होने के बाद प्रदेश को एक सुव्यवस्थित और आधुनिक थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिलेगी।
व्यापार और रोजगार को मिलेगी नई गति
प्रशासन के अनुसार, नया थोक बाजार व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रायपुर को एक मजबूत व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
यह परियोजना व्यापारियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
लोकार्पण कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि होंगे शामिल
समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी और अधिकारी मौजूद रहेंगे।
डूमरतराई का यह नवीन थोक बाजार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आधुनिक अधोसंरचना और जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।