नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को छह दिवसीय तीन देशों—इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड—की यात्रा पर रवाना हो गए। 6 से 11 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करना, कूटनीतिक साझेदारियों को नई गति देना तथा व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग को विस्तार देना है।
रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण है और इसका उद्देश्य मित्र देशों के साथ व्यापक रणनीतिक सहयोग को और सशक्त बनाना है।
इंडोनेशिया से होगी दौरे की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में रहेंगे। यह यात्रा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर हो रही है। जनवरी 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी रह चुके हैं।
जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री योग्याकर्ता का भी दौरा करेंगे, जो इंडोनेशिया का प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहर है।
ऑस्ट्रेलिया में व्यापार और तकनीक पर चर्चा
इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहेंगे। यहां दोनों देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, शिक्षा, कौशल विकास, मोबिलिटी, क्रिटिकल एवं उभरती तकनीकों तथा खेल सहयोग जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा। हाल ही में लागू हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।
न्यूजीलैंड में आर्थिक सहयोग पर रहेगा जोर
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 10 और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड पहुंचेंगे। यहां प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन पर चर्चा होने की संभावना है।
यह पिछले लगभग 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-विरोधी गतिविधियां भी रहेंगी एजेंडे में
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत इस दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के समक्ष भारत-विरोधी गतिविधियों, विशेष रूप से खालिस्तान समर्थक चरमपंथी तत्वों की गतिविधियों का मुद्दा भी उठाएगा। इसके साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर भी विशेष चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और इंडो-पैसिफिक रणनीति को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।