‘पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं’, विदेश मंत्रालय ने साफ किया- यह सिर्फ विदेश यात्रा का दस्तावेज

नई दिल्ली || नागरिकता सत्यापन को लेकर जारी बहस के बीच विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर साफ किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक यात्रा दस्तावेज है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों की विदेश यात्रा को नियंत्रित करने के उद्देश्य से जारी किया जाता है। उन्होंने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने भी पासपोर्ट को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना था।

पासपोर्ट जारी करने से पहले होती है जांच

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पासपोर्ट नागरिकता का एकमात्र प्रमाण बन जाता है।

मंत्रालय के अनुसार, देश की कुल आबादी के 8 फीसदी से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है। ऐसे में हर भारतीय नागरिक के पास पासपोर्ट होना जरूरी नहीं है।

पासपोर्ट अधिनियम का दिया हवाला

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का हवाला देते हुए कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार जनहित में गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसी आधार पर पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विदेश मंत्रालय के बयान पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज मान्य होगा।

नागरिकता सत्यापन से जुड़े मुद्दों के बीच विदेश मंत्रालय का यह बयान एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

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