कांग्रेस का ममता बनर्जी पर हमला, ‘हिम्मत है तो मान लें कांग्रेस छोड़ना राजनीतिक गलती थी’

कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें कि कांग्रेस छोड़ना उनका राजनीतिक गलत फैसला था।

सुभंकर सरकार ने ममता बनर्जी को 21 जुलाई को कोलकाता के शहीद मीनार पर आयोजित होने वाले ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा कि ममता को इस आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करना चाहिए और इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

‘शहीद दिवस की विरासत कांग्रेस की है’

बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 21 जुलाई 1993 का आंदोलन युवा कांग्रेस के बैनर तले हुआ था और इस ऐतिहासिक तथ्य को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने राजनीतिक अतीत का सम्मान करता है, उसे जनता के बीच ज्यादा सम्मान मिलता है।

उन्होंने कहा, “अगर ममता बनर्जी वास्तव में साहसी हैं तो उन्हें अपनी राजनीतिक यात्रा के उस फैसले को स्वीकार करना चाहिए। वह कांग्रेस के कार्यक्रम में आएं और शहीदों को श्रद्धांजलि दें, उनका स्वागत है।”

1997 में ममता ने बनाई थी तृणमूल कांग्रेस

गौरतलब है कि 21 जुलाई 1993 को ममता बनर्जी के नेतृत्व में युवा कांग्रेस की रैली के दौरान पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से ममता हर साल 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाती हैं।

साल 1997 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। तब से बंगाल की राजनीति में टीएमसी एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरी है।

कांग्रेस के इस बयान के बाद राज्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

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