दशलक्षण पर्यूषण पर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा धर्म कहलाता है। उत्तम क्षमा का अर्थ है श्रेष्ठ क्षमा यानी सबको क्षमा करने का भाव दर्शाता है ।जैन धर्म में क्षमा धर्म जाने अनजाने में हुई भूल चूक के लिए मन वचन काया से क्षमा याचना और दूसरों को क्षमा करना सीखाता है ।मंदिर जी में पर्यूषण पर्व का पहला दिन बहुत ही उत्साह का माहौल था सभी भक्ति पूजा में रमे हुए नजर आ रहे थे दशलक्षण पर्व पर बाहर से आए हुए पंडित जी भिंड वालों को पूजा अर्चना के लिए आमंत्रित किया गया है आज उन्होंने पहले दिन पंडित डी पी जैन जी के साथ मंत्रोपचार का कार्य किया समाज के अध्यक्ष दिनेश जैन सचिव अमित जैन एवं कमेटी ने बताया कि आज का क्षमा धर्म हमें क्षमा करना और क्षमा मांगना सीखाता है। जैन धर्म का यह सर्वश्रेष्ठ धर्म है आज के दिन श्री जी की शांति धारा करने का सौभाग्य महेंद्र कुमार जी मयूर जैन जी को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात प्रथम चार कलश स्थापना का सौभाग्य , प्रवेश जैन, आदि जैन, श्रेयांश जैन, रचित जैन को प्राप्त हुआ 10 दिनों के लिए मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य बाबूलाल जी अजय बृजेश जैन को प्राप्त हुआ अखंड दीप प्रज्वलन का सौभाग्य समाज के अध्यक्ष दिनेश जी निश्चल जी जैन एवं परिवार को प्राप्त हुआ ध्वजारोहण का सौभाग्य जितेंद्र जी मितेंद्र जी जैन एवं परिवार को प्राप्त हुआ सौ धर्म इंद्र बनने का सौभाग्य जैन समाज के संरक्षक इंद्र कुमार जी विमला देवी जी जैन को प्राप्त हुआ इंद्र बनने का सौभाग्य नरेंद्र कुमार जी संदीप कुमार जी सुधीर कुमार जी नितिन कुमार जी जैन को प्राप्त हुआ शाम की भगवान महा आरती का सौभाग्य महिला मंडल को प्राप्त हुआ पहले ही दिन मंदिर जी में समाज के लोगों का अधिक से अधिक संख्या में उपस्थिती और बहुत ही उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा था धार्मिक उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा था।
