बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी: कांग्रेस से TMC और फिर बीजेपी तक का राजनीतिक सफर

कोलकाता |  पश्चिम बंगाल में राजनीतिक इतिहास के पन्ने पलट गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी के विधायक दल की बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित किया। बंगाल में बीजेपी की पहली पूर्णकालिक सरकार के साथ ही शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी पर कब्जा किया।

शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा

शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को हुआ। परिवार का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ था। उनके पिता सिसिर अधिकारी मेदिनीपुर में कांग्रेस के प्रभावशाली नेता थे। 12 साल की उम्र में ही शुभेंदु ने राजनीति में कदम रखने का संकल्प लिया।

वे 19 साल की उम्र में स्टूडेंट पॉलिटिक्स से जुड़े और 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि बने। 1995 में कांग्रेस के टिकट पर कांथी नगरपालिका से पार्षद चुने गए। 1998 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में बने TMC में शामिल हुए और 2006 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर prominence हासिल किया।

नंदीग्राम आंदोलन ने बनाई पहचान

2006–2007 में नंदीग्राम में हुई भूमि उच्छेद और SEZ को लेकर हुए आंदोलन में शुभेंदु ने किसानों और ग्रामीणों को संगठित किया। उनकी रणनीति और ‘व्हिस्पर कैंपेन’ ने आंदोलन को व्यापक बनाया। आंदोलन में पुलिस की गोलीबारी में 14 ग्रामीण मारे गए, लेकिन शुभेंदु का कद राजनीति में और बढ़ गया। इस सफलता के बाद उन्हें जंगलमहल और मुर्शिदाबाद-मालदा जिलों का पर्यवेक्षक बनाया गया।

टीएमसी से बीजेपी का सफर

26 नवंबर 2020 को शुभेंदु ने हुगली नदी पुल आयोग (HRBC) के पद से इस्तीफा दिया और अगले दिन राज्य के परिवहन मंत्री पद से भी हट गए। 17 दिसंबर 2020 को उन्होंने TMC की सदस्यता छोड़ दी और 19 दिसंबर को औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हुए। अमित शाह ने उनके बीजेपी में शामिल होने के दौरान उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर सार्वजनिक रूप से स्वागत किया।

विवाद और चुनौती

शुभेंदु अधिकारी का नाम शारदा चिटफंड और नारदा स्टिंग मामलों में आया, जिनमें सीबीआई और ईडी द्वारा पूछताछ की गई। हालांकि उनका दावा रहा कि वीडियो में दिखाई गई राशि चुनावी फंड थी।

बीजेपी में शामिल होने के बाद शुभेंदु ने हिंदुत्व के मुद्दों को अपनाते हुए राज्य में अपने चुनावी अभियान को प्रभावी बनाया। नंदीग्राम और भवानीपुर से जीतकर उन्होंने अमित शाह का भरोसा हासिल किया।

मुख्यमंत्री के रूप में प्राथमिक चुनौतियाँ

अब शुभेंदु अधिकारी के सामने बंगाल के इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करना, कानून व्यवस्था सुधारना और राजनीतिक हिंसा को रोकना मुख्य चुनौतियां हैं। साथ ही महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए 3,000 रुपये मासिक भत्ता, 1 करोड़ रोजगार देने, यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू करने और अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण उनके एजेंडे में शामिल हैं।

निष्कर्ष

बंगाल में बीजेपी का वनवास समाप्त हुआ है, लेकिन शुभेंदु अधिकारी के लिए यह केवल शुरुआत है। अब उन्हें राज्य में स्थिरता और विकास की राह पर बीजेपी की सरकार को मजबूत करना है।

 

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