नई दिल्ली | नीट यूजी पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़े और चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र देश के कम से कम 5 राज्यों में बेचा गया था। शुरुआती जांच के अनुसार, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा और राजस्थान में दूसरे नंबर पर पेपर की बिक्री हुई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेपर लीक का नेटवर्क बेहद संगठित था, जिसके तार महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों से जुड़े हुए थे। इस पूरे रैकेट में बिचौलियों और सॉल्वर गैंग ने करोड़ों रुपये की कमाई की।
20 से 50 लाख रुपये तक वसूले गए
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से एक-एक पेपर के लिए 20 लाख से 50 लाख रुपये तक वसूले गए। कई मामलों में कैश और गुप्त लेन-देन के जरिए पैसे लिए गए, ताकि कोई डिजिटल सबूत न छोड़ा जा सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अभिभावकों ने पेपर खरीदने के बाद उसे दूसरे लोगों तक भी पहुंचाया। एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितने छात्रों ने पेपर खरीदा था।
CBI तैयार कर रही खरीदारों की लिस्ट
अब जांच का फोकस सिर्फ पेपर लीक करने वाले मास्टरमाइंड और बिचौलियों तक सीमित नहीं है। सीबीआई उन प्रभावशाली अभिभावकों की सूची भी तैयार कर रही है, जिन्होंने भारी रकम देकर पेपर खरीदा था।
एजेंसी बैंक खातों की जांच कर रही है और उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिनके खातों से शिवराज मोटेगांवकर, पी.वी. कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे।
जांच अभी जारी
सीबीआई का कहना है कि कई अहम किरदार अभी भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी की दो विशेष टीमें डिजिटल सबूत और अन्य दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है और जांच में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
इस खुलासे के बाद देश की परीक्षा प्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।