नकटी भूमि विवाद: कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, 1931 के दस्तावेज दिखाकर कार्रवाई पर उठाए सवाल

रायपुर । नकटी भूमि विवाद को लेकर कांग्रेस की जांच समिति ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू ने 1930-31 की चकबंदी रिपोर्ट और वर्ष 2024 में आवास विभाग के सचिव द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए दावा किया कि संबंधित भूमि चारागाह के रूप में दर्ज है और उस पर ग्रामीणों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस्ती हटाने की कार्रवाई भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई।

धनेंद्र साहू ने कहा कि अक्टूबर 2024 में आवास सचिव द्वारा रायपुर कलेक्टर को भेजे गए पत्र में कई खसरा नंबरों की करीब 29.172 हेक्टेयर भूमि आवंटन के लिए उपलब्ध कराने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पत्र में क्षेत्र में बने कच्चे-पक्के मकानों और बढ़ते अतिक्रमण का जिक्र करते हुए भूमि जल्द उपलब्ध कराने की बात कही गई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं तो हाउसिंग बोर्ड द्वारा भूमि नहीं मांगने का दावा कैसे किया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि खसरा नंबर 407, 477 और 524 की भूमि आज भी राजस्व रिकॉर्ड में चारागाह के रूप में दर्ज है और इस पर निर्णय का अधिकार ग्रामसभा के पास है। उन्होंने 1931 के चकबंदी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि यह भूमि लंबे समय से ग्रामीणों के उपयोग में रही है और बिना वैधानिक प्रक्रिया के इसे नहीं लिया जा सकता।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि नकटी गांव के आसपास भाजपा नेताओं के कब्जे वाली जमीनों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। पार्टी ने पूरे क्षेत्र की जमीनों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीणों को वर्षों से प्रधानमंत्री आवास, बिजली, सड़क और नल-जल जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहा है, इसलिए उन्हें बेदखल करना उचित नहीं है।

कांग्रेस ने कहा कि वह नकटी के प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ी है और इस मामले को राजनीतिक एवं कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगी। वहीं, इस मामले में राज्य सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *