पश्चिम बंगाल | पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव परिणामों के तीन सप्ताह बाद एक बार फिर बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव नहीं हारी, बल्कि “वोट लूट” के जरिए पार्टी को हराया गया.
फालता विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम वाले दिन फेसबुक लाइव के जरिए जनता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अगर निष्पक्ष चुनाव होते तो टीएमसी को 220 से 230 सीटें मिलतीं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बीजेपी की मदद की और भवानीपुर सीट पर उन्हें “जबरदस्ती हराया गया.”
ममता ने कहा, “बीजेपी ने प्रशासनिक आतंक फैलाया. हमारे दो से ढाई हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. पार्टी कार्यालय तोड़े गए और फेरीवालों की रोजी-रोटी छीनी गई.” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में टीएमसी को विपक्ष का दर्जा नहीं दिया जा रहा, जबकि पार्टी के 89 विधायक हैं. ममता के मुताबिक, नियमों के अनुसार 30 विधायकों पर भी विपक्ष का दर्जा मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी को जानबूझकर इससे वंचित रखा जा रहा है.
धार्मिक मुद्दों पर भी बीजेपी सरकार को घेरते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि “आप नमाज नहीं चाहते, आवाज कम करने को कहते हैं, लेकिन सबके लिए एक जैसे नियम होने चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाया कि इमाम और पुजारी भत्ता भी बंद कर दिया गया है और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने शुभेंदु अधिकारी पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “अगर वह कहते हैं कि 2500 लोगों को जेल भेजेंगे, तो पहले उन्हें खुद जेल जाना चाहिए. सारदा से लेकर नारदा तक हर घोटाले में उनका नाम है.”
ममता बनर्जी ने स्टेडियम से फुटबॉल की मूर्ति हटाए जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वह मूर्ति एक कलाकार ने बनाई थी और उसकी देशभर में सराहना हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक बदले की भावना से उसे हटाया गया.
फालता सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत और टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के चौथे स्थान पर रहने के बाद बंगाल की राजनीति में सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है. बीजेपी जहां इसे जनता के जनादेश की जीत बता रही है, वहीं टीएमसी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है.