UNSC में बड़ा उलटफेर: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार सुरक्षा परिषद का सदस्य बना किर्गिस्तान

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के गैर-स्थायी सदस्य देशों के चुनाव में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। किर्गिस्तान ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में जगह बनाई है, जबकि पाकिस्तान का कार्यकाल वर्ष के अंत में समाप्त होने जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद किर्गिस्तान, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और जिम्बाब्वे को सुरक्षा परिषद का नया गैर-स्थायी सदस्य चुना गया है। इन सभी देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक चलेगा।

नए सदस्य उन देशों की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है। इनमें पाकिस्तान, पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया शामिल हैं।

कई दौर की वोटिंग के बाद मिली जीत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार देश को महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के कम से कम दो-तिहाई मत हासिल करना आवश्यक होता है।

इस वर्ष पांच सीटों के लिए सात देशों ने दावेदारी पेश की थी। ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और जिम्बाब्वे पहले दौर में ही निर्वाचित हो गए थे। वहीं एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए कई चरणों की वोटिंग हुई, जिसके बाद किर्गिस्तान ने फिलीपींस को पीछे छोड़ते हुए पहली बार परिषद में स्थान हासिल किया।

क्या है UNSC की संरचना?

United Nations Security Council में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य—United States, Russia, China, France और United Kingdom—शामिल हैं।

शेष 10 सदस्य गैर-स्थायी होते हैं, जिन्हें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर दो वर्ष के लिए चुना जाता है। हर साल इनमें से पांच सीटों पर नए देशों का चुनाव किया जाता है।

वैश्विक शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र का सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली निकाय माना जाता है। इसका प्रमुख दायित्व अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। परिषद प्रतिबंध लगाने, शांति मिशन भेजने और विशेष परिस्थितियों में सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति रखती है।

किर्गिस्तान का पहली बार परिषद में पहुंचना उसके लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही परिषद की संरचना में नया बदलाव देखने को मिलेगा।

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