पश्चिम बंगाल | पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले इलाके में बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया. जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “लोकतंत्र की जीत और धमकियों की हार” बताया.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “फलता की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है. लोकतंत्र की जीत हुई है और धमकियों की हार हुई है. देबांग्शु पांडा को रिकॉर्ड अंतर से जीत के लिए हार्दिक बधाई.” उन्होंने कहा कि यह नतीजा पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रति बढ़ते जनविश्वास को दर्शाता है.
फलता सीट पर हुए रिपोल में बीजेपी ने टीएमसी को करारी शिकस्त दी. देबांग्शु पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले, जबकि सीपीएम उम्मीदवार शंभु नाथ कुर्मी 40,645 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले. वहीं टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान सिर्फ 7,783 वोट हासिल कर चौथे स्थान पर रहे और उनकी जमानत जब्त हो गई.
फलता सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इसे लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. ऐसे में बीजेपी की यह जीत राज्य की राजनीति में बड़े संकेत के तौर पर देखी जा रही है. मतदान से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से हटने की बात कही थी, हालांकि नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी होने के कारण उनका नाम ईवीएम से हटाया नहीं जा सका.
यह पुनर्मतदान 21 मई को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराया गया था. चुनाव के दौरान टीएमसी का प्रचार अभियान भी काफी कमजोर नजर आया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फलता का परिणाम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है.
2011 में वाम मोर्चा सरकार के अंत और तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है जब किसी बड़े दल के उम्मीदवार की विधानसभा चुनाव में जमानत जब्त हुई है. देबांग्शु पांडा की जीत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है.