महंगाई का झटका: मई में थोक महंगाई 9.68% पहुंची, 43 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर

देश | देश में महंगाई ने एक बार फिर आम जनता की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 15 जून को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में थोक महंगाई दर (WPI Inflation) बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह अप्रैल के 8.26 प्रतिशत की तुलना में तेज उछाल है और पिछले 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।

महंगाई में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह ईंधन, बिजली, खाने-पीने की चीजों और मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की कीमतों में तेज वृद्धि बताई जा रही है। विशेष रूप से कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोतरी ने पूरे थोक बाजार पर असर डाला है।

आंकड़ों के मुताबिक, फ्यूल और पावर श्रेणी में थोक महंगाई बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी। वहीं कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है और इसका असर उपभोक्ता वस्तुओं पर पड़ा है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। फूड इंडेक्स की महंगाई दर 3.11 प्रतिशत से बढ़कर 4.49 प्रतिशत हो गई है, जिससे रोजमर्रा की जरूरत का सामान महंगा हुआ है।

इसी बीच, खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले 16 महीनों का उच्च स्तर है। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक) ने भी मौद्रिक नीति समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज क्षेत्र में तनाव जैसी परिस्थितियों ने भारत की आयात लागत बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई दे रहा है।

फिलहाल सरकार और केंद्रीय बैंक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन महंगाई के बढ़ते आंकड़ों ने आम जनता की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *