देश | मध्य पूर्व में 10 जून को हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस टैंकर एमटी सेट्टेबेलो को निशाना बनाया गया, उसे हमले से पहले करीब 60 बार चेतावनी दी गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहाज ने कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह टैंकर “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था और कथित रूप से ईरानी तेल की अवैध ढुलाई में शामिल था। दावा यह भी किया गया कि जहाज ने अमेरिकी प्रतिबंधों और ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश की थी। हमले से पहले फ्लेयर्स, फ्लाईओवर और रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए कई बार चेतावनी दी गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बयान के मुताबिक, जहाज के क्रू को इंजन रूम खाली करने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया था, जिसके बाद कार्रवाई की गई और टैंकर को निष्क्रिय कर दिया गया। घटना के समय जहाज पर मौजूद 24 क्रू मेंबर्स में से 21 को बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीयों की मौत की पुष्टि बाद में हुई।
इस घटना पर भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से बातचीत कर इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। भारत ने कहा कि किसी भी कमर्शियल जहाज पर इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं है।
उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआती बयान में ईरान पर आरोप लगाया था, हालांकि बाद में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की। ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है और मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।
फिलहाल घटना की जांच और कूटनीतिक बातचीत जारी है, जबकि इस हादसे ने भारत-अमेरिका संबंधों में भी एक नई संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी है।