नई दिल्ली। दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान ने भारत की परमाणु क्षमताओं पर चिंता जताई है। वैश्विक रक्षा और हथियार नियंत्रण पर नजर रखने वाली संस्था SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट में भारत की परमाणु तैयारियों को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की परमाणु क्षमता में लगातार विस्तार हुआ है और कुछ हथियारों को अब परिचालन तैनाती (Operational Deployment) की श्रेणी में माना जा रहा है। हालांकि भारत लगातार अपनी घोषित ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर कायम रहने की बात कहता रहा है।
कैनिस्टराइजेशन तकनीक पर पाकिस्तान की नजर
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट के बाद प्रतिक्रिया देते हुए भारत की मिसाइल प्रणालियों में इस्तेमाल हो रही कैनिस्टराइजेशन तकनीक का जिक्र किया है। इस तकनीक के तहत मिसाइलों को पहले से तैयार स्थिति में सुरक्षित रखा जाता है, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें तेजी से सक्रिय किया जा सके।
इस्लामाबाद का कहना है कि भारत की जमीन, हवा और समुद्र आधारित परमाणु क्षमताओं में बढ़ोतरी क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड
SIPRI के अनुमान के अनुसार, भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत अपनी रणनीतिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, परमाणु हथियारों की तैनाती का उद्देश्य मुख्य रूप से प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) बनाए रखना होता है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की अपील
रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है।
वहीं, भारतीय पक्ष का रुख रहा है कि देश की परमाणु नीति रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु क्षमता को लेकर प्रतिस्पर्धा नई नहीं है। दोनों देश अपनी-अपनी सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से रणनीतिक तैयारियां करते रहे हैं। ऐसे में SIPRI रिपोर्ट के बाद आई प्रतिक्रियाओं को क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।