बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिव भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल मेरिट सूची में नाम शामिल होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। यदि सक्षम प्राधिकारी पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर देता है, तो मेरिट सूची में शामिल उम्मीदवार भी नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।
मामला सूरजपुर जिले में वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों पर निकली भर्ती से जुड़ा है। रामानुजनगर निवासी देवेन्द्र कुमारी साहू ने अन्य पिछड़ा वर्ग (महिला) श्रेणी से आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के बाद उनका नाम मेरिट सूची में शामिल हुआ, लेकिन सात वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया।
नियुक्ति नहीं मिलने पर देवेन्द्र कुमारी ने हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 11 सितंबर 2025 को पंचायत निदेशक से व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताने को कहा कि वर्ष 2018 से भर्ती प्रक्रिया लंबित क्यों है।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2018 में जिला पंचायत सूरजपुर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले राज्य शासन और वित्त विभाग की आवश्यक पूर्व स्वीकृति नहीं ली थी। इस कारण भर्ती विज्ञापन नियमों के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया था।
सरकार ने यह भी बताया कि पंचायत निदेशालय के 20 जनवरी 2025 के आदेश के अनुपालन में जिला पंचायत सूरजपुर के सीईओ ने 22 अक्टूबर 2025 को पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया।
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब भर्ती प्रक्रिया ही वैधानिक रूप से रद्द कर दी गई है, तब केवल मेरिट सूची में नाम होने के आधार पर नियुक्ति की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने याचिका को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि मेरिट सूची में स्थान प्राप्त होना नियुक्ति की गारंटी नहीं है।