बिलासपुर। प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घूमते आवारा मवेशियों के प्रबंधन को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सभी जिलों में लगातार निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव द्वारा दायर शपथपत्र पर विचार किया। शपथपत्र में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप प्रदेश में आवारा पशुओं और डॉग बाइट की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में चल रहे प्रयासों की जानकारी पर अदालत ने संतोष व्यक्त किया, लेकिन यह भी कहा कि यह मामला सीधे तौर पर आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा है। ऐसे में केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा और निगरानी भी जरूरी है।
खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि अब तक की प्रगति के साथ अद्यतन शपथपत्र 22 सितंबर तक अदालत में प्रस्तुत किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डॉग बाइट की घटनाओं की रोकथाम और आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए किए जा रहे उपाय प्रभावी ढंग से लागू हो रहे हैं।