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राजनीतिक फेरबदल के संकेत
बंगाल, असम चुनाव परिणाम के बाद छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बड़े राजनीतिक फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में विष्णु मंत्रिमंडल के कई चेहरे बदले जा सकते हैं। वहीं कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसके लिए शीर्ष स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कहा जा रहा है कि बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग संभाग से एक-एक मंत्री को रिप्लेस किया जा सकता है। और दो महिला मंत्रियों की विष्णु केबिनेट में एन्ट्री हो सकती है। इसमें सर्वप्रथम बस्तर से लता उसेन्डी और पंडरिया से भावना बोहरा का नाम शामिल है। वहीं दो सीनियर मंत्रियों की भी ताजपोशी हो सकती है। इसमें बिलासपुर से अमर अग्रवाल और कुरुद से अजय चंद्राकर का नाम उभरकर सामने आया है। कुल मिलाकर मई माह या जून में विष्णु मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
रिटायरमेंट के पहले राव की मुश्किलें बढ़ी
वर्तमान वन बल प्रमुख व्ही श्रीनिवास इसी माह रिटायर हो रहे हैं। संभवत: ७ तारीख को डीपीसी आयोजित की जाएगी। हालाकि राव के रिटायरमेंट के पहले उनके खिलाफ पीएमओ में की गई शिकायत के आधार पर विभाग की एसीएस को जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है। अमूमन अभी तक की शिकायतों के पत्र सीएस के नाम से आते थे, जिसमें अब तक कोई विशेष कार्रवाई नहीं की गई है। कहा तो यह भी जाता है कि पूर्व में सीएस रहे अमिताभ जैन से श्रीनिवास राव के संबंध काफी करीबी रहे हैं, जिसके बदौलत मामला रफा-दफा कर दिया जाता था। भाजपा नेता ननकीराम कवंर की शिकायत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अब फिर एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर राव के खिलाफ जांच होनी है। माना जा रहा है कि वर्तमान एसीएस रिचा शर्मा अपने किसी भी काम में सिर्फ खानापूर्ति नहीं करती हैं, इसलिए अब श्रीनिवास राव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
परफारमेंस सुधारने कवायद
छत्तीसगढ कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कांग्रेस विधायकों को परफारमेंस सुधारने की नशीहत दी है। साथ ही संगठन के साथ तालमेल बनाने पर भी जोर दिया है। दरअसल छत्तीसगढ पहुंचे प्रभारी सचिन पायलट ने विधायकों से वन टू वन चर्चा कर क्षेत्र की समस्याओं और उनके कार्यो तथा संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा की। कहा जा रहा है कि विष्णु सरकार का आधा कार्यकाल बीत जाने के बाद अब कांग्रेस फिर छत्तीसगढ़ में विशेष फोकस करने की तैयारी में है। दरअसल कांग्रेस छत्तीसगढ़ राज्य में बाकी राज्यों की अपेक्षा मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में आधा समय बीतते ही रणनीतिक रुप से तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। साथ ही जिलाध्यक्षों के साथ तालमेल बनाकर स्थानीय समस्याओं को जनता के समक्ष उजागर करने और आंदोलनों की धार तेज करने विधायकों को निर्देश दिए गए हैं।
रजत के चर्चे
2012 बैच के आईएएस अफसर रजत बंसल ने जनसंपर्क आयुक्त की कमान संभालने के बाद होर्डिंग संचालकों पर लगाम कस दी है। दरअसल आईएएस रजत बंसल की पहचान एक रिजल्ट देने वाले अफसर के रुप में है। बंसल पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार शासन की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने के हर एक माध्यम को मजबूत करने में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि सवंाद में होर्डिंग्स को लेकर जमकर धांधली की शिकायत थी। इसलिए अब प्रतिदिन कौन-कौन सी होर्डिंग्स कहां लगाई गई है उसकी सूचना ऐप में डालनी होगी। बताया जा रहा है कि आईएएस रजत बंसल ने साफ तौर पर कहा है कि शासन की योजनाओं के प्रचार-प्रसार में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिसके बाद से होर्डिंग संचालकों में खलबली मची हुई है।
अफसरों पर होगी कार्रवाई
घटिया निर्माण कार्यो ने सरकार की छवि बिगाडऩे का काम किया है। घटिया निर्माण और सड़कों की हालत ने विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आलम यह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्वयं जिला कलेक्टरों से इसके लिए बात करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री ने बेमेतरा कलेक्टर से फोन में बात कर निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही है। दरअसल राज्य में निर्माण एजेंसियां लगातार विवादित हैं, उनके कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। निर्णाण कार्यों का न होना और खराब क्वालिटी के निर्माण के बदौलत सरकार के कार्यों पर भी सवाल उठने लगे हैं। सम्भवत: इसीलिए अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्वयं इसके लिए आगे आना पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ और सिम्बा
छत्तीसगढ राज्य अपनी कला एवं संस्कृति के लिए सदैव से जाना जाता रहा है। भिलाई स्टील प्लांट जो लाखों लोगों को रोजगार देने के साथ ही देश की नीव को मजबूत करने का काम करता है, वह छत्तीसगढ़ की पहचान के साथ यहां की धरोहर भी है। लेकिन अब छत्तीसगढ़ इन सब के लिए नहीं बल्कि देश में सिम्बा यानि की शराब के लिए जाना जाएगा। यह मैं नहीं कह रहा बल्कि सिम्बा नामक बियर कम्पनी की ब्रान्डिग में एक महिला कहती नजर आ रही है। क्या वास्तव में अब राज्य की पहचान बियर यानि की सिम्बा से होगी? क्या छत्तीसगढ़ की मूल पहचान खोने लगी है? खैर किसी विज्ञापन के प्रचार से किसी को ऐतराज नहीं, लेकिन जिन शब्दों का प्रयोग ब्राडिंग के लिए किया जा रहा है, उसके लिए कई भाजपा नेता भी खुले रुप से विरोध कर चके हैं। भाजपा नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि यह विज्ञापन घोर आपित्तजनक है। छत्तीसगढ की पहचान को नष्ट करने और तोडऩे मरोडऩे का काम उचित नहीं है। खैर इसमें क्या कार्रवाई हो सकती है, इस ओर सरकार को विचार करना चाहिए। दरअसल सिम्बा नाम का एक बियर, शराब है जिसकी ब्रान्डिंग का विज्ञापन इन दिनों विवादों के घेरे में है।
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