रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता सरकार के मजबूत संकल्प, सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और स्थानीय समाज की भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बस्तर में घटा नक्सल प्रभाव
विजय शर्मा ने बताया कि एक समय देश के अधिकांश माओवादी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे, जिनमें बड़ी संख्या नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिलों में केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से हजारों परिवार प्रभावित हुए और करीब 2,040 आम नागरिकों की जान गई। अब ऐसे मामलों का पंजीयन कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
‘सरकार नहीं, संकल्प बदला’
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रशासनिक ढांचा नहीं बदला, बल्कि सरकार की कार्यशैली और संकल्प बदला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा बलों को पूरी स्वतंत्रता और भरोसे के साथ काम करने का अवसर दिया, जिससे निर्णायक परिणाम सामने आए।
कांग्रेस पर साधा निशाना
विजय शर्मा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहायता मिलने के बावजूद नक्सलवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने झीरम घाटी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र पर हमला करने वाले माओवादियों का किसी भी रूप में महिमामंडन स्वीकार्य नहीं हो सकता।
आत्मसमर्पण अभियान में समाज की अहम भूमिका
उन्होंने बताया कि गोंड, हल्बा, भतरा, मुरिया और माड़िया समाज के प्रमुखों ने जंगलों तक पहुंचकर युवाओं को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। अक्टूबर 2025 के पुनर्वास अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और समाज के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इलवद पंचायत योजना के तहत जिन पंचायतों में सभी माओवादी आत्मसमर्पण कर देते हैं, वहां एक करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं।
सुरक्षा के साथ विकास पर जोर
डिप्टी सीएम ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 118 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। डीआरजी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और बीएसएफ सहित सभी सुरक्षा बलों ने समन्वय के साथ काम किया है। उन्होंने कहा कि जो सुरक्षा कैंप पहले केवल सुरक्षा के प्रतीक माने जाते थे, वे अब अस्पताल, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल परिसर और अन्य जनसुविधाओं के केंद्र बन रहे हैं। भविष्य में 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
सड़क, बैंक और डिजिटल सुविधाओं से बदली तस्वीर
उन्होंने बताया कि पीएमजीएसवाई के तहत 220 किलोमीटर लंबी 93 सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से जारी है। पीएमजीएसवाई-4 के तहत बस्तर के छोटे गांवों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने का विशेष प्रावधान किया गया है। जगरगुंडा और किस्ताराम जैसे इलाकों में बैंक, बस सेवा, आवास और आधार पंजीयन जैसी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।
पुनर्वास नीति से नई शुरुआत
विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के लिए पुनर्वास नीति को और प्रभावी बनाया है। उन्हें कौशल विकास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘सुनो नक्सली हमारी बात’ अभियान के तहत नक्सल प्रभावित युवाओं को राष्ट्रपति से मुलाकात का अवसर भी मिला।
‘बस्तर का भविष्य विकास से तय होगा’
अपने संबोधन के अंत में डिप्टी सीएम ने कहा कि बस्तर का भविष्य अब बंदूक नहीं, बल्कि शिक्षा, खेल, सहकारिता और विकास तय करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे तथा पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की नई कहानी लिखी जाएगी।