महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी सरकार, 2,814 करोड़ रुपये की योजना को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली । देश में महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के लिए 2,814 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान वाली पूंजीगत व्यय सहायता योजना (कैपेक्स सपोर्ट स्कीम) को मंजूरी दी है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पांच वर्षों की अवधि वाली इस योजना का उद्देश्य देश में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना है।

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके माध्यम से देश में महत्वपूर्ण खनिजों की वैल्यू चेन को मजबूत करने, औद्योगिक उत्पादन को प्रोत्साहित करने और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

चार नए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की योजना

सरकार की इस योजना के तहत कुल चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें दो संयंत्र लिथियम प्रसंस्करण और दो संयंत्र निकेल प्रसंस्करण के लिए होंगे।

प्रस्तावित संयंत्रों की क्षमता इस प्रकार होगी:

  • लिथियम: दो संयंत्र, प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन।
  • निकेल: दो संयंत्र, प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन।
  • कोबाल्ट: निकेल के प्रसंस्करण के दौरान उप-उत्पाद के रूप में इसकी प्राप्ति भी प्रस्तावित है।

योजना के तहत पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी दी जाएगी। प्रत्येक लिथियम परियोजना के लिए अधिकतम 500 करोड़ रुपये और प्रत्येक निकेल परियोजना के लिए अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता निर्धारित की गई है।

चयन प्रक्रिया में अपनाई जाएगी प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में आवेदकों की तकनीकी योग्यता का मूल्यांकन होगा। तकनीकी रूप से योग्य आवेदक ही दूसरे चरण की वित्तीय बोली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन न्यूनतम लागत के आधार पर किया जाएगा। यानी जिस पात्र बोलीदाता द्वारा कम पूंजीगत सहायता की मांग की जाएगी, उसे चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलेगी।

सरकारी सहायता का भुगतान निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों से जुड़ी तीन किस्तों में किया जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग को मिलेगा फायदा

लिथियम, निकेल और कोबाल्ट आधुनिक बैटरी निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बड़े ऊर्जा भंडारण सिस्टम में किया जाता है।

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा की मांग बढ़ने के साथ इन खनिजों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर इनके प्रसंस्करण की क्षमता विकसित होने से बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूती मिल सकती है।

इसके अलावा रक्षा क्षेत्र, विशेष इस्पात और उन्नत विनिर्माण उद्योगों को भी इस पहल से लाभ मिलने की संभावना है।

आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम

वर्तमान में भारत महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और उच्च शुद्धता वाले खनिज उत्पादों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। वैश्विक स्तर पर इन खनिजों के प्रसंस्करण का बड़ा हिस्सा कुछ ही देशों में केंद्रित है।

ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने का असर भारतीय उद्योगों पर भी पड़ सकता है।

सरकार की नई योजना का उद्देश्य देश में ही प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित कर इस निर्भरता को कम करना और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

केंद्र सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। इससे देश में नई औद्योगिक परियोजनाओं, तकनीकी निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सरकार का लक्ष्य केवल खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उनके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की क्षमता भी देश के भीतर विकसित करना है। इससे भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी निर्माण, रक्षा और आधुनिक तकनीकी उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

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