6 से 11 नवंबर तक चलेगा दीपोत्सव का पर्व, पांचों दिन घर में पकवान बनाने की परंपरा को माना जाता है शुभ

नई दिल्ली । दीपावली का त्योहार केवल दीप जलाने, पूजा-पाठ और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताएं भी हैं। ऐसी ही एक मान्यता धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिनों तक घर की रसोई में कड़ाही चढ़ाने और परिवार के लिए अपने हाथों से पकवान बनाने की है। वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपोत्सव के दौरान घर के चूल्हे पर अग्नि प्रज्वलित रखना और कुछ न कुछ विशेष पकवान बनाना शुभ माना जाता है।

इस साल पंचदिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी और 11 नवंबर को भाई दूज के साथ इसका समापन होगा। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे।

पांचों दिन कड़ाही चढ़ाना क्यों माना जाता है शुभ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अग्नि तत्व का संबंध दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण से माना जाता है। रसोई घर में अग्नि के माध्यम से कच्चा अनाज भोजन में परिवर्तित होता है। इसे ऊर्जा, शुद्धता और परिवर्तन का प्रतीक माना गया है।

मान्यता है कि त्योहारों के दौरान घर की रसोई में अग्नि प्रज्वलित रहने और परिवार के लिए भोजन तैयार करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है।

इसके अलावा, घर में पकवान बनाने की परंपरा परिवार के सदस्यों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी है।

रेडीमेड खाने के बजाय घर में बनाएं पकवान

आज की व्यस्त दिनचर्या में लोग त्योहारों पर भी बाजार से मिठाइयां, नमकीन और तैयार भोजन मंगाने लगे हैं। हालांकि, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली के पांचों दिनों में घर की रसोई में कुछ न कुछ जरूर बनाना चाहिए।

इसके लिए बहुत अधिक पकवान बनाने की जरूरत नहीं है। परिवार की पसंद की मिठाई, कोई पारंपरिक व्यंजन या साधारण पकवान भी बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य घर में उत्सव का माहौल बनाए रखना और पारिवारिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है।

धनतेरस से भाई दूज तक क्या बनाएं?

दीपोत्सव के पांच दिनों में अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार अलग-अलग पकवान बनाए जा सकते हैं।

1. धनतेरस (6 नवंबर): इस दिन धनिये की पंजीरी, खीर, मिठाई या घर में पसंद किया जाने वाला कोई पारंपरिक पकवान बनाया जा सकता है।

2. नरक चतुर्दशी (7-8 नवंबर): छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी के अवसर पर घर में पारंपरिक मिठाइयां, उड़द दाल के बड़े या अन्य व्यंजन बनाने की परंपरा है।

3. दीपावली (8 नवंबर): लक्ष्मी-गणेश पूजन के अवसर पर पूरी, सब्जी, खीर, लड्डू और अन्य मिठाइयां बनाई जा सकती हैं।

4. गोवर्धन पूजा (10 नवंबर): इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, कई तरह की सब्जियां और पकवान बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है।

5. भाई दूज (11 नवंबर): इस दिन बहनें अपने भाइयों की पसंद के पकवान और मिठाइयां तैयार करती हैं। परिवार के साथ भोजन करने की परंपरा इस त्योहार को और खास बनाती है।

परिवार के रिश्तों को मजबूत करने का भी माध्यम है यह परंपरा

पहले दीपावली से कई दिन पहले ही घरों में मिठाइयां, नमकीन और दूसरे पारंपरिक व्यंजन बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती थीं। परिवार के सदस्य मिलकर पकवान तैयार करते थे। इससे रसोई में चहल-पहल के साथ त्योहार का उत्साह भी बढ़ता था।

यह परंपरा केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों को साथ समय बिताने और खुशियां साझा करने का अवसर भी देती है।

क्या है पंचदिवसीय दीपोत्सव का कैलेंडर?

  • 6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस
  • 7 नवंबर, शनिवार: काली चौदस और छोटी दिवाली की परंपराएं
  • 8 नवंबर, रविवार: नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली, लक्ष्मी-गणेश पूजन
  • 10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
  • 11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज

इस बार तिथियों के संयोग के कारण प्रमुख त्योहार 6 से 11 नवंबर के बीच मनाए जाएंगे। 9 नवंबर को अमावस्या से जुड़ी अन्य धार्मिक परंपराएं भी रहेंगी।

धार्मिक मान्यता के साथ जुड़ा है अपनापन

धनतेरस से भाई दूज तक घर के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाने की परंपरा का मूल भाव घर में खुशहाली, समृद्धि और आपसी प्रेम बनाए रखना है। मान्यता है कि त्योहारों पर अपने हाथों से तैयार भोजन में अपनापन होता है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर उत्सव का आनंद लेते हैं।

इसलिए दीपोत्सव के इन दिनों में अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार घर में पकवान बनाएं और परिवार के साथ त्योहार की खुशियां साझा करें।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *