तिल्दा-नेवरा। दीपावली पर्व के मद्देनजर शहर में पटाखों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। इसी बीच शहर के बीचोंबीच संचालित बड़ी-बड़ी पटाखा दुकानों और उनके गोदामों में भारी मात्रा में पटाखों के भंडारण को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। घनी आबादी और व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि यदि किसी पटाखा दुकान या गोदाम में आग लगती है, तो उसका असर आसपास के मकानों, दुकानों और राहगीरों पर भी पड़ सकता है। पटाखों में आग लगने की स्थिति में लगातार विस्फोट होने से नुकसान और अधिक बढ़ने की आशंका रहती है।
लाइसेंस और भंडारण क्षमता की जांच जरूरी
पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए निर्धारित नियमों एवं सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। ऐसे में यह जांच करना जरूरी है कि शहर में संचालित दुकानों और गोदामों के पास वैध लाइसेंस हैं या नहीं। साथ ही, लाइसेंस में निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही पटाखों का भंडारण किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी पुष्टि होनी चाहिए।
गोदामों में अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित निकास और अन्य आवश्यक इंतजामों की उपलब्धता भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी
शहर के बीचोंबीच पटाखों का भंडारण होने की स्थिति में जिला प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण कर दुकानों एवं गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी जरूरी है।
हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समय रहते कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। पटाखा कारोबार के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
शहर की सुरक्षा किसी भी व्यापारिक हित से बड़ी है। ऐसे में प्रशासन को पटाखा दुकानों और गोदामों के लाइसेंस, भंडारण क्षमता तथा सुरक्षा मानकों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। क्योंकि मामला केवल पटाखा कारोबार का नहीं, बल्कि तिल्दा-नेवरा के हजारों नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा है।