नई दिल्ली | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई का आधार फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह तलाशी अभियान दिल्ली और राजस्थान के कार्यालयों सहित अन्य स्थानों पर चल रहा है। ED ने बताया कि वेदांता के खिलाफ FEMA के तहत जांच शुरू की गई है।
इस कार्रवाई के समय वेदांता समूह अपने डिमर्जर (Demerger) की प्रक्रिया में है। इसके तहत कंपनी को छह अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में बांटने की योजना बनाई गई है। डिमर्जर का उद्देश्य कारोबार को अलग-अलग शाखाओं में व्यवस्थित करना होता है।
वेदांता का रुख:
कंपनी ने कहा है कि वह अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रही है। कंपनी प्रवक्ता ने कहा,
“हम सभी नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मामला नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए फिलहाल अधिक टिप्पणी नहीं कर सकते।”
क्या है आरोप:
FEMA के तहत यह कार्रवाई तब की जाती है जब किसी विदेशी मुद्रा लेनदेन में गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन होने का संदेह होता है। इसमें अवैध रूप से विदेश में पैसे भेजना, विदेशी प्रॉपर्टी बनाना या विदेशी निवेश नियमों का उल्लंघन शामिल हो सकता है।
इलेक्टोरल बांड का मामला:
वेदांता समूह ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के इलेक्टोरल बांड खरीदे थे। इनमें भाजपा को लगभग 230 करोड़ रुपये, कांग्रेस को 125 करोड़ रुपये, बीजू जनता दल को 40 करोड़ रुपये, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 5 करोड़ रुपये और तृणमूल कांग्रेस को करीब 20 लाख रुपये मिले।
यह तलाशी अभियान उस समय आया है जब वेदांता के डिमर्जर और बड़े कारोबारी फैसलों पर कंपनियों और निवेशकों की निगाहें लगी हैं।