नई दिल्ली। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलिडेस की हालिया भारत यात्रा के बाद रक्षा सहयोग को लेकर नई संभावनाएं सामने आई हैं। इस दौरान भारत और साइप्रस के बीच आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि साइप्रस ने भारत की उन्नत रक्षा प्रणालियों—ब्रह्मोस मिसाइल, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र कामिकाजे ड्रोन—में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
रक्षा सहयोग की संभावनाओं पर बढ़ी नजर
भारत और साइप्रस के बीच औपचारिक समझौता तो मुख्य रूप से सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर हुआ है, लेकिन रक्षा उपकरणों को लेकर रुचि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में कोई रक्षा सौदा होता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए बड़ा कदम होगा।
रणनीतिक स्थिति के कारण बढ़ी चर्चा
साइप्रस की भौगोलिक स्थिति पूर्वी भूमध्य सागर में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह क्षेत्र यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच समुद्री मार्गों के लिहाज से रणनीतिक केंद्र है। ऐसे में किसी भी सैन्य सहयोग को क्षेत्रीय संतुलन पर असर डालने वाला माना जा रहा है।
तुर्किए और पाकिस्तान की नजरें
साइप्रस का तुर्किए के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहा है और दोनों देशों के बीच उत्तरी साइप्रस क्षेत्र को लेकर विवाद भी है। वहीं पाकिस्तान के साथ तुर्किए के रक्षा सहयोग को देखते हुए इस संभावित बदलाव पर क्षेत्रीय समीकरणों पर असर की चर्चा तेज हो गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर भारत की उन्नत मिसाइल और ड्रोन सिस्टम इस क्षेत्र में पहुंचते हैं, तो यह रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
ब्रह्मोस को लेकर वैश्विक रुचि
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल अपनी गति और सटीकता के कारण दुनिया की सबसे उन्नत क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। हाल के वर्षों में इसके निर्यात को लेकर कई देशों की रुचि बढ़ी है।
फिलहाल साइप्रस के साथ किसी भी रक्षा सौदे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बातचीत और रुचि ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।