नई दिल्ली। ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी अब घटना के दिन की पूरी गतिविधियों को समझने के लिए एक वर्चुअल टाइमलाइन और डिजिटल रीक्रिएशन तैयार करने की योजना पर काम कर रही है।
जांच एजेंसियां 12 मई की रात की हर गतिविधि—मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधि, CCTV फुटेज और गवाहों के बयान—को जोड़कर एक “डिजिटल अवतार” तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।
20 लाख के शेयर और पारिवारिक विवाद की जांच
परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, ट्विशा के पास लगभग 20 लाख रुपये के शेयर थे, जिन्हें कथित तौर पर ससुराल पक्ष की ओर से उनके नाम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जा रहा था। CBI इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक विवाद इस मामले में तनाव का कारण बना।
इसके अलावा दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और पारिवारिक विवाद जैसे आरोपों की भी जांच विभिन्न डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
“टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन” से बनेगी पूरी टाइमलाइन
CBI इस केस में टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का उपयोग कर रही है, जिसके तहत हर डिजिटल सबूत—जैसे CCTV फुटेज, Wi-Fi लॉग, कॉल डिटेल्स और लोकेशन डेटा—को जोड़कर एक सटीक समय-रेखा तैयार की जाएगी।
जांच का सबसे अहम हिस्सा उन अंतिम 40 मिनटों को माना जा रहा है, जब ट्विशा कथित तौर पर जिम एरिया में मौजूद थीं और फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
सबूतों और फुटेज पर उठे सवाल
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कुछ CCTV क्लिप्स सार्वजनिक क्यों हुए और क्या किसी महत्वपूर्ण फुटेज को जानबूझकर हटाया गया या उसमें कोई छेड़छाड़ की गई।
CBI का मानना है कि डिजिटल रीक्रिएशन से यह समझने में मदद मिलेगी कि घटनाक्रम के दौरान कौन-कौन मौजूद था और किन परिस्थितियों में घटना हुई।
फिलहाल एजेंसी इस मामले में परिवार, घरेलू स्टाफ और संबंधित लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है, ताकि हर पहलू को स्पष्ट किया जा सके।