अमेरिका-ईरान समझौते पर दुनिया भर के नेताओं की प्रतिक्रिया, परमाणु हथियारों को लेकर सख्त रुख

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित शांति समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई देशों के नेताओं ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम बताया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

वहीं यूरोप के चार प्रमुख देशों—ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली—ने संयुक्त बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए और इस प्रक्रिया में सभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सहयोग करेंगी।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पूरी तरह से बाधारहित होनी चाहिए और ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रहना चाहिए।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह समझौता कूटनीति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है और इसे पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ सकती है।

ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड सहित कई अन्य देशों ने भी इस समझौते का स्वागत किया और इसे ऊर्जा आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार के लिए राहतकारी कदम बताया।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि समझौता पूरी तरह अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इससे क्षेत्र में तनाव कम होगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के वास्तविक प्रभाव इसके कार्यान्वयन और ईरान-अमेरिका के बीच आगे की वार्ताओं पर निर्भर करेंगे।

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