@thethinkmedia.com भोपाल
मध्यप्रदेश मे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर आनिश्चित्कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल मे जाने के कारण पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। अधिकारियों ने बकायदा आम सूचना चस्पा कर आमजन को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध ना करा पाने में असमर्थता जाहिर की है। वही हड़ताल पर जाने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों ने शिवराज सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुये साफ तौर पर कह दिया है की इस बार हड़ताल तभी खत्म होगी जब नियमितीकरण की घोषणा होगी। सरकार के किसी भी आश्वासन मे हड़ताल समाप्त नहीं होगी। क्योकि पूर्व मे भी शिवराज सरकार ने सिर्फ संविदा कर्मचारियो के साथ धोखा किया है। ज्ञात हो शिवराज सरकार ने बीते विधानसभा चुनाव के पहले वर्ष 2018 मे नई संविदा नीति पर मुहर लगाई। जिसमें नियमित कर्मचारी की भांति संविदा कर्मचारियों को सभी सुविधा देने का नियम बनाया गया, नियमित कर्मचारियों के समकक्ष 90 प्रतिशत वेतन देने का नियम बनाया। लेकिन आज चार साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एनएचएम के कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया गया। जिसके कारण कर्मचारियों मे खासा रोष है।
सभी जिलों में दिखा हड़ताल का असर- चुनावी साल के पहले अपनी मांगों को लेकर सभी जिलों के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने इस बार खुलकर हड़ताल का समर्थन किया। प्रदेश के लगभग सभी जिलों में हड़ताल का व्यापक असर दिखा। संविदा कर्मचारियों ने हड़ताल मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। हर ब्लाक, जिला कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। हड़ताल के पहले दिन से ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगडऩे लगी है। केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी अभियान हड़ताल के कारण बुरी तरह से प्रभावित रहेंगे।
आश्वासन से नहीं खत्म होगी हड़ताल, नियमितीकरण की घोषणा करें सरकार- हड़ताली कर्मचारियों से तकरीबन 3-4 माह पहले एनएचएम मुख्यालय भोपाल में सांकेतिक आंदोलन कर सरकार को चेताया था कि इस बार यदि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी आंदोलन में गए तो किसी भी कोरे आश्वासन से हड़ताल की वापसी नहीं होगी। नियमितीकरण तथा 90 प्रतिशत की नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करें। तभी हड़ताली कर्मचारी पुन: काम पर वापस जायेंगे।
शिवराज सरकार के गले की फांस बनेंगे संविदा कर्मचारी
मध्यप्रदेश मे हुये 2018 के विधनसभा चुनाव मे संविदा कर्मचारियों की नाराजगी के कारण शिवराज सरकार को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। बाद में राजनीतिक समीकरण बिगडऩे के कारण शिवराज सिंह ने फिर मध्यप्रदेश की सरकार में कब्जा जमा लिया। अब एक बार फिर चुनाव आते-आते संविदा कर्मचारी सरकार के खिलाफ मुखर होकर हड़ताल पर उतर गए हैं। जिसका सीधा नुकसान 2023 में होने वाले विधनसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।