रायपुर । विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा प्रशासनिक क्षमता के विकास के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह शिविर सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा देश के विभिन्न नीति विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने शासन, विकास और जनसेवा से जुड़े विविध विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
सुशासन को मजबूत करने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि शिविर से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे और इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक सुधारों के रूप में लागू किया जाएगा।
पर्यटन और जिला-आधारित विकास पर जोर
‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषयक सत्र में विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा केंद्र बनाने की क्षमता पर बल दिया। वहीं ‘विकासपरक राजनीति’ विषय पर चर्चा में जिला-स्तरीय GDP आधारित विकास मॉडल और स्थानीय आर्थिक योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
तकनीक, कृषि और सुशासन पर विस्तृत चर्चा
शिविर में उभरती तकनीकों जैसे एआई, 5G, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रशासन को अधिक दक्ष और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने पर भी विशेषज्ञों ने सुझाव दिए।
पहले के सुझावों पर हुआ अमल
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चिंतन शिविरों में मिले सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है, जिससे फाइलों का निपटारा तेज और पारदर्शी हुआ है। वहीं 1076 हेल्पलाइन और ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और ऑनलाइन बनाया गया है।
विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में अहम कदम
शिविर के समापन सत्र में कहा गया कि यह आयोजन केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के सुझावों को राज्य की आगामी नीतियों में शामिल करने की बात कही गई।
अंत में इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया |