दिल्ली | दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 19 साल पुराने जामिया नगर थाना आगजनी मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान समेत 13 आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जुटाने, दंगा भड़काने, सरकारी काम में बाधा डालने और हत्या के प्रयास जैसी धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। वहीं, पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर 17 अन्य आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया।
यह मामला 22 अगस्त 2007 का है, जब जामिया नगर इलाके में कथित तौर पर बड़ी भीड़ इकट्ठा कर पुलिस थाने पर हमला किया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, भीड़ ने थाने पर पथराव किया, आगजनी की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। घटना के दौरान तीन लोगों को गोली लगी थी, जबकि कई पुलिसकर्मियों समेत कुल 18 लोग घायल हुए थे।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपियों ने भीड़ को उकसाने और हिंसा फैलाने में भूमिका निभाई। इसी आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 149, 186, 307 और 395 के तहत आरोप तय किए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन 17 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, उन्हें इस मामले में आरोप मुक्त किया जाता है।
करीब दो दशक पुराने इस मामले में अब आरोप तय होने के बाद आगे ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने सबूत और गवाह पेश करेंगे।